बैटरी अदला-बदली व्यवस्था से इलेक्ट्रिक कार क्रांति को मिलेगा बल : एडीबी

भाषा | नई दिल्‍ली Oct 23, 2017 05:31 PM IST

एशियाई विकास बैंक (एडीबी) का कहना है कि बैटरी की अदला-बदली व्यवस्था से फौरी तौर पर भारत में इलेक्ट्रिक कार क्रांति को बल मिल सकता है। उल्लेखनीय है वाहनों से होने वाले प्रदूषण से परेशान भारत इस पर काबू पाने के प्रयासों के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दे रहा है। सरकार 10,000 इलेक्ट्रिक कारें खरीदने के लिए निविदा की घोषणा पहले ही कर चुकी है। वहीं 50,000 इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों के लिए विनिर्माता कंपनियों से निविदाएं इस साल के आखिर तक आमंत्रित किए जाने की संभावना है। एडीबी की वेबसाइट पर एक आलेख (ब्लॉग) में लिखा गया है कि भारतीय सड़कों पर छह लाख से अधिक ऐसे इलेक्ट्रिक रिक्शे चल रहे हैं जिनमें सीसे-अम्ल (लेड-एसिड) की बैटरी लगी हैं। हर वाहन में बैटरी को पूरी तरह चार्ज करने में 8-9 घंटे लगते हैं और बैटरी को साल में दोबार बदलना पड़ता है। इसमें लिखा गया है, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए भारत की पहल आगे बढ़ रही है लेकिन अनेक चुनौतियां कायम हैं। इनमें से एक तो चार्जिंग के लिए बुनियादी ढांचे का अभाव है।

यह आलेख एडीबी में प्रधान ऊर्जा विशेषज्ञ सोहेल हस्नी व ग्याम मोटर वर्कर्स इंडिया के सीईटो राजा ग्याम ने लिखा है। इसमें कहा गया है - अधिक से अधिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के साथ साथ तात्कालिक समाधान बुनियादी ढांचे (बैटरियों) की भागीदारी हो सकती है। इस आलेख में भारत के कई शहरों में वाहन प्रदूषण की गंभीर स्थिति को रेखांकित किया गया है। भारत ने पेरिस जलवायु समझौते 2015 पर हस्ताक्षर किए हैं जिसके चलते उसे 2030 तक वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में अपने हिस्से को घटना होगा। ब्लॉग के अनुसार-भारत में मौजूदा चार्जिंग स्टेशन खुले पार्किंग स्थलों में हैं और बिजली बहुत ही अव्यवस्थित तरीके से ली जा रही है। हालांकि अनेक वाहन विनिर्माता, बिजली कंपनियां व सरकारी निकाय इन हालात में बदलाव की दिशा में काम कर रहे हैं।

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