उद्योग जगत से कर्ज की मांग नरम

अनूप रॉय और अभिजित लेले | मुंबई Mar 22, 2017 09:43 PM IST

कर्ज उठाव की दर रही सुस्त

► बैंकों ने उद्योगों को अपनी जमा का महज एक-तिहाई कर्ज का किया आवंटन
कर्ज मांग नहीं होने से बैंकों को सरकारी प्रतिभूतियों में करना पड़ा ज्यादातर निवेश

लोगों की ओर से कर्ज की कम मांग और बैंकों पर फंसे कर्ज के दबाव की चिंता की वजह से 2016-17 में भारतीय उद्योग जगत में कर्ज उठाव की दर सुस्त रही। सालाना आधार पर 3 मार्च तक कुल गैर-खाद्य बैंक उधारी महज 4.8 फीसदी बढ़ी यानी 3.24 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 74.55 लाख करोड़ रुपये रही। सामान्य तौर पर इस उधारी में से करीब 45 से 50 फीसदी हिस्सा उद्योगों का होता है, जिनमें बड़ी कंपनियों और सूक्ष्म, छोटी एवं मझोली कंपनियां शामिल हैं। लेकिन यह हिस्सेदारी अब 40 फीसदी से भी नीचे चली गई है। इसी दौरान कुल उधारी 4.1 फीसदी बढ़ी है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 20 जनवरी को बड़े उद्योगों को दिए जाने वाले कर्ज में 4.4 फीसदी की कमी आई है जबकि मझोले उद्योग खंड में यह गिरावट 10.2 फीसदी दर्ज की गई। इसी तरह सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के कर्ज उठाव में 5.1 फीसदी की कमी देखी गई। 20 जनवरी तक उद्योगों द्वारा लिया गया कुल कर्ज 25.86 लाख करोड़ रुपये था जो कुल जमा 104.95 लाख करोड़ रुपये का एक-चौथाई से भी कम था।

दूसरी ओर बैंकों की जमा इस दौरान बढ़कर 105 लाख करोड़ रुपये हो गई। बैंकरों का कहना है कि कंपनियां खुद ही कर्ज लेने को इच्छुक नहीं हैं। भारतीय स्टेट बैंक के प्रबंध निदेशक (कॉरपोरेट बैंकिंग समूह) बी श्रीराम ने कहा कि जमा के तौर पर बैंकों में आई रकम और कर्ज मांग में काफी अंतर है। ऐसे में ज्यादातर जमा की रकम को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश किया गया है। बजाज समूह के संस्थागत वित्त प्रमुख प्रबल बनर्जी ने कहा कि मांग में तेजी नहीं दिख रही है। ऐसे में जब तक मांग में सुधार नहीं होता है, कर्ज की मांग भी नरम बनी रह सकती है।

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