फंसे कर्ज पर नई नीति इस महीने के अंत तक

दिलाशा सेठ | नई दिल्ली Mar 24, 2017 09:42 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ मिलकर सरकार गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए अगले सप्ताह एक नई नीति पेश करने की तैयारी कर रही है। इस नीति में आरबीआई का अहम भूमिका होगी। इस घटनाक्रम से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि  बहु-आयामी रणनीति से आरबीआई को बड़े डिफॉल्टरों पर नजर रखने में मदद मिलेगी।
केंद्रीय बैंक के उपायों में बैंकों द्वारा खराब या फंसी परिसंपत्तियों की नीलामी, एक-मुश्त निपटान, अधिक दूरदर्शी पैनलों की स्थापना और जेएलएफ पुनर्गठन मुख्य रूप से शामिल होंगे। इनमें बड़े इरादतन डिफॉल्टरों के खिलाफ कदम उठाए जाने की भी व्यवस्था होगी। इस रणनीति पर वित्त मंत्रालय, आरबीआई और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के बीच हुई कई बैठकों में चर्चा की जा चुकी है।
एक अधिकारी ने कहा, 'नई नीति पर काम हो रहा है और इसे इस महीने के अंत तक पेश कर दिया जाएगा।' सरकार बैंकों को एनपीए की समस्या सुलझाने के लिए कुछ खास मामलों में हेयरकट के लिए प्रोत्साहित करेगी। एनपीए की मुख्य समस्या बड़ी कंपनियों से जुड़ी हुई है जो खासकर इस्पात, बिजली, बुनियादी ढांचा और टेक्सटाइल क्षेत्रों की हैं।
एनपीए के तेज समाधान के लिए संयुक्त ऋणदाताओं के फोरम (जेएलएफ) में बदलाव की भी अनुमति होगी। जेएलएफ में अधिक ब्याज जोखिम वाले 3-4 बैंकों को पुनर्गठन पैकेज को मंजूरी प्रदान करने की अनुमति होगी। सरकार ने ओवरसाइट कमेटी का दायरा व्यापक बनाए जाने का भी प्रस्ताव रखा है जो उसे विभिन्न बैंकों द्वारा भेजे जाने वाले मामलों की प्रक्रिया पर विचार करेगी। आरबीआई ने स्कीम फॉर सस्टेनेबल स्ट्रक्चरिंग ऑफ स्ट्रेस्ड ऐसेट्ïस (एस4ए) के तहत तीन सदस्यीय ओवरसाइट कमेटी बना रखी है जो यह सुनिश्चित करती है कि स्कीम के तहत ऋण पुनर्गठन पारदर्शी ढंग से हो। प्रत्येक सौदे को उसके क्रियान्वयन से पहले ओवरसाइट पैनल द्वारा स्वीकृत किया जाना जरूरी होगा।
इस मुद्दे पर वित्त मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक में भी चर्चा की जा चुकी है। नई नीति में इस्पात और बिजली क्षेत्र जैसे क्षेत्रों में दबाव से जूझ रही परिसंपत्तियों को सेल और एनटीपीसी जैसे संपन्न पीएसयू को बेचे जाने के लिए नीलामी की भी मदद ली जा सकती है। अधिकारियों ने कहा कि पीएसयू को इन परिसंपत्तियों को खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। दिसंबर 2016 तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की 6.8 लाख करोड़ रुपये की गैर-निष्पादित आस्तियों में से 70 प्रतिशत बड़े कॉरपोरेट घरानों से जुड़ी हुई थीं।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने हाल में कहा, 'ऐसा नहीं है कि सैकड़ों और हजारों कंपनियों ने यह समस्या पैदा की है। गंभीर एनपीए की समस्या खासकर 30-35 कंपनियों तक सीमित है।'

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