दो बड़े बैंकों का विलय कर सकती है सरकार : राय

अनूप रॉय | मुंबई Mar 30, 2017 09:23 PM IST

बैंक बोर्ड ब्यूरो के चेयरमैन विनोद राय ने कहा है कि सरकार बैंकों के एकीकरण की इच्छुक है, लेकिन फंसे कर्ज की समस्या के समाधान के जरिए बैलेंस शीट में मजबूती के बिना वह ऐसा नहीं करेगी। साथ ही ऐसे मामले में सबसे पहले दो बड़े बैंकों का विलय हो सकता है।
विनोद राय क्रेडिट सुइस एनुअल इन्वेस्टर्स कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे, जिसके बारे में विदेशी ब्रोकरेज ने क्लाइंटों के लिए एक नोट तैयार किया है और बिजनेस स्टैंडर्ड के पास इस रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध है।
रिपोर्ट में कहा गया है, एकीकरण की प्रक्रिया से पहले सरकार गैर-निष्पादित कर्ज के मसले के समधान की प्रतीक्षा कर रही है और वह चाहती है कि इस मामले में आगे बढऩे से पहले बैंलेंस शीट मजबूत हो जाए। बैलेंस शीट की स्थिति एक तरह का अवरोध है क्योंकि बड़े पीएसयू की संख्या बहुत ज्यादा नहीं है जिनका विलय किया जा सकता है। इसलिए शुरुआत में सरकार दो बड़े बैंकों के विलय पर विचार कर सकती है।
मजबूत क्षेत्रीय इकाई बनाना प्राथमिकता होगी, लेकिन किसी भी विलय में सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि कैसे शाखाओं व कर्मचारियों की अतिरिक्त संख्या कम की जाए। इसके लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जाएगा मसलन शाखाओं की स्वैपिंग, स्वैच्छिक रिटायरमेंट योजना और नई नियुक्ति पर धीमी रफ्तार। राय के हवाले से क्रेडिट सुइस ने रिपोर्ट में ये बातें कही है।
भारतीय स्टेट बैंक के साथ पांच सहायक बैंकों के विलय के साथ सरकार पहले ही एकीकरण की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है, जो 1 अप्रैल से प्रभावी होगी। सहायक बैंंक ने अपने-अपने कर्मचारियों के लिए वीआरएस योजना भी सामने रखी है।
इस सम्मेलन में राय की टिप्पणी बाजार की सामान्य अवधारणा के उलट है, जहां बड़े बैंकों के साथ छोटे बैंकों के विलय की उम्मीद की जा रही है। इस योजना के तहत धीरे-धीरे एकीकरण के जरिए कुछ वैश्विक स्तर के बैंक बनाया जाना है।
हालांकि बड़े बैंकों के एकीकरण पर बात नई नहीं है। साल 2000 में संकेत मिले थे कि यूनियन बैंक का विलय बैंक ऑफ इंडिया के साथ हो सकता है, लेकिन इस संबंध में सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
क्रेडिट सुइस के मुताबिक, सरकार कंपनी के आधार के बजाय उद्योग के आधार पर पुनर्गठन पैकेज सामने रखने पर विचार कर रही है। रिपोर्ट में कहा गया है, सरकार कंपनी के आधार के बजाय उद्योग के आधार पर पुनर्गठन पैकेज पर विचार कर रही है क्योंकि दबाव इन्फ्रा व स्टील जैसे क्षेत्रों में संकेंद्रित है।
राय ने कहा, नए पुनर्गठन का मकसद फैसला लेने की प्रक्रिया में सुधार लाना होगा। रिपोर्ट में कहा गया है, समस्या वाले कर्ज के समाधान के लिए सरकार कई चीजों मसलन ओवरसाइट कमेटी की संख्या में इजाफा करने, मौजूदा व्यवस्था में लचीलापन आदि पर विचार कर रही है ताकि इस समाधान में फैसला लेने की प्रक्रिया सबसे बड़ा अवरोध है।
विनोद राय ने कहा, सरकार वित्त वर्ष 2017-18 में राइट्स इश्यू पर विचार करेगी क्योंकि बजट में पूंजी आवंटन काफी कम रहा है और इसकी भरपाई अल्पांश शेयरधारक कर सकते हैं। बजट में अगले साल के लिए 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है जबकि वित्त वर्ष 2017 में यह 25,000 करोड़ रुपये था। सरकार वित्त वर्ष 2019 तक इंद्रधनुष योजना के जरिए 70,000 करोड़ रुपये भी दे रही है, हालांकि कहा गया है कि जरूरत के मुताबिक और पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी।

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