'डिफॉल्टरों को शर्मिंदा करने के लिए हमने की गांधीगीरी'

दिलाशा सेठ और इंदिवजल धस्माना |  Apr 05, 2017 09:33 PM IST

बीएस बातचीत

फंसे कर्ज की वसूली में पंजाब नैशनल बैंक ने खुद अपनी पहचान बनाई है। बैंक की प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी उषा अनंतसुब्रमण्यन ने दिलाशा सेठ और इंदिवजल धस्माना को दिए साक्षात्कार में इस बाबत विस्तार से बातचीत की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश ...

गैर-निष्पादित आस्तियों के मसले पर पीएनबी ने कैसे कामयाबी पाई है, वहीं अन्य सरकारी बैंक इस मसले पर संघर्ष कर रहे हैं?

कुछ बड़ी संपत्तियां हैं जो कंसोर्टियम के दायरे में हैं, वहीं छोटी संपत्तियां बैंक के दायरे में। वसूली में कामयाबी खुद की बदौलत मिली है। छह-सात लोगों का समूह गैर-निष्पादित आस्तियों के खाते की निगरानी करता है। वे शाखाओं और क्षेत्रीय कार्यालयों को इसमें मदद करते हैं कि कैसे वसूली हो सकती है। वसूली के लिए हमारे पास व्हाट्सऐप पर मजबूत ग्रुप भी है, जहां सर्किल व क्षेत्रीय कार्यालय से हर दिन 9 बजे के बाद वसूली की खबरें पोस्ट की जाती हैं। आदर्श रूप से हम रोजाना 34 करोड़ रुपये की वसूली चाहते हैं। हम डिफॉल्टरों को शर्मिंदा कर रहे हैं। गांधीगीरी भी हमारे लिए कारगर रहा है - हमारे कर्मी डिफॉल्टरों के पास जाते हैं और गुलाब देकर उन्हें शर्मिंदा करते हैं। पूरे पड़ोस को इस बारे में खबर लग जाती है। समूह ने शानदार काम किया है। हम उन संपत्तियों पर भी नजर रख रहे हैं जिन्हें संपत्ति पुनर्गठन कंपनियों को बेची जा सकती है। साथ ही जमानत के तौर पर रखी गई संपत्तियों की बिक्री भी हो सकती है।

एनपीए नीति को लेकर आपकी क्या राय है? इस मामले में आपकी क्या अपेक्षाएं हैं?

आज बैंक की तरफ से कर्ज को बट्टे खाते में डालने के बारे में लोग नहीं जानते। आप 20, 30 या 40 फीसदी की बात कर सकते हैं। इस मामले में स्पष्टता की दरकार है। अन्यथा आरबीआई के कई अन्य तरीके एसडीआर, एस4ए व अन्य उपलब्ध हैं। बट्टे खाते में कितनी रकम डाली जाए, इस पर स्पष्टता होनी चाहिए।

आपकी तरफ से एनपीए की वसूली में कितने फीसदी की कटौती की जा रही है?

एनपीए की घोषणा के दिन हमारे खाते में जो होता है हम उससे नीचे नहीं जाते। हम उसकी वसूली की कोशिश करते हैं। सभी खाते प्रावधान वाले हैं, ऐसे में मुनाफे से रकम बट्टे खाते में जाती है और न्यूनतम बकाया खाते में होता है।

क्या सरकारी इकाइयों की तरफ से अपने-अपने क्षेत्रों में दबाव वाली संपत्तियों का प्रबंधन अपने हाथ में लेने के मामले में क्या प्रगति हुई है क्योंकि सरकारी स्वामित्व वाले बैंकों को प्रवर्तक की तलाश में मुश्किल हो रही है?

अभी तक कुछ भी नहीं हुआ है। हर पीएसयू की अपनी समस्या है - स्टील के लिए सेल, हाइड्रोपावर के लिए एनएचपीसी, शिप के लिए कोचीन शिपयार्ड, बिजली के लिए एनटीपीसी। उनके साथ मानवशक्ति की समस्या व अन्य परेशानियां हैं, ऐसे में बहुत ज्यादा नहीं हो पाया है। 

एनपीए पर हाथ आजमाने के बाद उधारी में इजाफे की आपकी क्या योजना है? अर्थव्यवस्था में सुधार में वक्त लगेगा।

उधारी में हमें ठीक-ठाक बढ़त दिखनी चाहिए। इसका मतलब यह है कि इस मामले मेंं दो अंकों की ओर बढऩा, न कि इससे ज्यादा। एमएसएमई में काफी काम हो रहा है, न कि विनिर्माण व सेवा क्षेत्र में। पीएनबी के पास काफी मजबूत कृषि पृष्ठभूमि है और हमारी 66 फीसदी शाखाएं ग्रामीण व अर्ध शहरी इलाकों में है। इसके अतिरिक्त खुदरा क्षेत्र में भी मांग है।

नोटबंदी के बाद बैंकों के पास काफी नकदी आई, अतिरिक्त नकदी निकालने का क्या तरीका है? क्या आरबीआई अपनी नीतिगत समीक्षा में इस बाबत कोई पहल करेगा?

हर कोई प्रस्तावित स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी की बात कर रहा है। यह आरबीआई के पास एक और हथियार के तौर पर होगा।

इस हफ्ते आरबीआई की नीतिगत दर पर आपकी क्या अपेक्षाएं हैं?

इसमें शायद स्थिरता बनी रहने की संभावना है।

कौन सी गैर-प्रमुख संपत्तियां आप बेच सकते हैं?

बेचने के लिए हमारे पास कुछ ही गैर-प्रमुख संपत्तियां हैं। हम पीएनबी हाउसिंग में निवेशित हैं। इसकी लॉक इन अवधि नवंबर में समाप्त होगी और इस तरह से एक अच्छी संपत्ति बेचने की हम योजना बना रहे हैं। इसके बाद यूटीआई म्युचुअल फंड है, जिसके बारे में हमें अगले कदम पर फैसला लेना है। हमारे पास पीएनबी गिल्ट है, जो भारत का एकमात्र सूचीबद्ध प्राइमरी डीलर है। यहां भी बिक्री की पर्याप्त गुंजाइश है। 

क्या आप पीएनबी हाउसिंग फाइनैंस की सात फीसदी हिस्सेदारी बेचेंगे?

हम नवंबर के  बाद ही इस पर फैसला ले सकते हैं। मूल्यांकन व जरूरत से तय होगा कि हम सात फीसदी, पांच फीसदी या आठ फीसदी बेचेंगे।
कीवर्ड PNB, Usha Anantsubramaniam,

  
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