स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति को ठंडी प्रतिक्रिया

अभिजित लेले | मुंबई Apr 14, 2017 09:44 PM IST

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के सहयोगी बैंकों के कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) की पेशकश को खराब प्रतिक्रिया मिली है। नौकरी छोडऩे के बदले मिलने वाले कम आकर्षक पैकेज और नौकरियों का बाजार कमजोर होने की वजह से इसके लिए अर्हता वाले अधिकारियों व कर्मचारियों ने इसमें कम ही रुचि दिखाई है। एसबीआई की पेशकश के मुताबिक सहयोगी बैंकों के 12,500 कर्मचारी वीआरएस के मानकों में आते थे, जिनमें से सिर्फ 3,500 कर्मचारियों ने आखिरी तिथि (5 अप्रैल 2017) तक यह विकल्प अपनाया, जिनमें से करीब 800 कर्मचारियों ने अपने आवेदन 12 अप्रैल तक वापस ले लिए, जो आवेदन वापस लेने की आखिरी तिथि थी। 
 
एसबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस योजना को लेकर प्रतिक्रिया उम्मीद से कम (करीब 50 प्रतिशत) रही है। लेकिन इससे कोई समस्या नहीं होने वाली है। जो लोग नौकरियों पर आना चाहते हैं, वे बोझ नहीं हैं। इनमें से तमाम को लंबे समय तक काम करने का अनुभव है, जिससे बैंंक को फायदा होगा। अधिकारी ने कहा कि इन कर्मचारियों को उन लोगों की जगह रखा जा सकता है, जो स्वाभाविक रूप से सेवानिवृत्त हो रहे हैं, कर्मचारियों को पद देने के पहले उनके कौशल व अनुभव पर विचार किया जाएगा। 
 
स्टेट बैंक आफ बीकानेर ऐंड जयपुर (एसबीबीजे), स्टेट बैंक आफ हैदराबाद (एसबीएच), स्टेट बैंक आफ मैसूर (एसबीएम), स्टेट बैंक आफ पटियाला (एसबीपी) और स्टेट बैंक आफ त्रावणकोर (एसबीटी) के साथ भारतीय महिला बैंक (बीएमबी) का विलय 1 अप्रैल से एसबीआई में हो गया है। बैंक ने वीआरएस के लिए कुछ मानदंड तय किए थे, जैसे इस विकल्प को अपनाने वाले लोगों का अनुभव 20 साल ज्यादा हो और जिन्होंने 55 साल उम्र पूरी कर ली हो। 
 
एसबीआई समूह के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि पैकेज (अधिकतम 30 महीनों का वेतन) आकर्षक नजर नहीं आया। साथ ही बाहर नौकरियां मिलने की संभावना भी अच्छी नहीं है। इसके अलावा सहायक महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी को उसे एसबीआई के सर्किल के भीतर नौकरी करने का मौका मिल सकेगा। अधिकारी ने कहा कि इससे  अधिकारियों को गृह जनपद या उसके आसपास नियुक्त होने की संभावना है। विलय के बाद एसबीआई के कर्मचारियों की संख्या 2,70,011 है, जिनमें सहयोगी बैंकों और बीएमबी के 69,191 कर्मचारी भी शामिल हैं। 
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