स्टेट बैंक की सावधि जमा दरें घटीं

अभिजित लेले | मुंबई Apr 30, 2017 09:27 PM IST

भारतीय स्टेट बैंक ने मध्यावधि व दीर्घावधि खुदरा सावधि जमा पर ब्याज दरों में कटौती कर दी है। मुनाफा बढ़ाने व फंड की लागत घटाने के उद्देश्य से 50 आधार अंक तक की गई यह कटौती 29 अप्रैल से लागू होगी। नई दरें नए जमा और नवीकरण पर लागू होंगी। मई 2017 महीने के लिए उधारी दर पर आधारित फंड की सीमांत लागत (एमसीएलआर) में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके प्रतिस्पर्धी पंजाब नैशनल बैंक ने एमसीएलआर में 1 मई से होने वाली विभिन्न परिपक्वता के लिए 10 से 15 आधार अंक की कमी कर दी है। पंजाब नैशनल बैंक 3 मई 2017 से विभिन्न परिपक्वता अवधि वाली खुदरा सावधि जमा पर ब्याज दरों में भी कटौती करेगा। 
 
भारतीय स्टेट बैंक द्वारा दरों के ढांचे में बदलाव से साफ होता है कि दो साल से लेकर 3 साल की कम अवधि के लिए सावधि जमा पर सालाना ब्याज दर 6.25 प्रतिशत होगी, जबकि पुरानी दर 6.75 प्रतिशत थी। वहीं 3 साल से 10 साल की जमा पर ब्याज दर 6.25 प्रतिशत होगी, जो पहले 6.5 प्रतिशत थी। स्टेट बैंक सबसे ज्यादा ब्याज दर की पेशकश एक साल की सावधि जमा पर 6.9 प्रतिशत करता है। 
 
इस कटौती के बावजूद भारतीय स्टेट बैंक मध्यावधि व दीर्घावधि सावधि जमाओं पर अपने निजी क्षेत्र के प्रतिस्पर्धी एचडीएफसी बैंक की तुलना में ज्यादा ब्याज दे रहा है। निजी क्षेत्र का एक और बैंक आईसीआईसीआई सावधि जमा पर स्टेट बैंक की तुलना में 25 से 50 आधार अंक ज्यादा ब्याज की पेशकश 2 साल से 10 साल की जमा पर कर रहा है। दरों पर फैसले के बारे में भारतीय स्टेट बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नए वित्त वर्ष से सस्ते कर्ज की हिस्सेदारी अधिक होगी क्योंकि नोटबंदी के बाद चालू खातों और बचत खातों में भारी मात्रा में धन जमा हुआ है। लेकिन इसका लाभ सीमित दायरे में होगा, क्योंकि लोग समय के साथ अपना जमा धन निकाल लेंगे।
 
नोटबंदी के बाद कम दरोंं पर - चालू खाता और बचत खाता (सीएएसए) में जमा बढ़ा है। यह दिसंबर 2016 में 46,55 प्रतिशत हो गया, जो सितंबर 2016 के आखिर में 42.74 प्रतिशत था।  दिसंबर 2015 में निम्न दरों पर जमा का प्रतिशत 42.70 था। भारतीय स्टेट बैंक ने कहा कि ब्याज की आमदनी व मुनाफे को लेकर बैंक को चिंता है, क्योंकि कर्ज की मांग कमजोर बनी हुई है। दिसंबर 16 में बैंक का ब्याज से शुद्ध मुनाफा (घरेलू) 10 आधार अंक गिरकर 3.03 प्रतिशत रह गया जो दिसंबर 15 में 3.22 प्रतिशत था। कर्ज की सुस्ती और उधारी दर कम होने की वजह से मुनाफा घटा है। 
 
दिसंबर 2016 को समाप्त तीसरी तिमाही के परिणामों की घोषणा करते हुए स्टेट बैंक की चेयरमैन अरुंधती भट्टाचार्य ने कहा था कि मार्च 2017 के आखिर तक एनआईएम में 5 से 6 आधार अंक की गिरावट आ सकती है। जहां तक उधारी दरों की बात है, बैंक ने सभी परिपक्वता पर एमसीएलआर में 90 आधार अंक की तीब्र कटौती के बाद अब 4 महीने के लिए एमसीएलआर अपरिवर्तित रखा है। 
कीवर्ड bank, loan, debt, भारतीय रिजर्व बैंक,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक