पहले रकम, फिर कर्ज पुनर्गठन

देव चटर्जी | मुंबई May 09, 2017 09:32 AM IST

बैंक चाहते हैं प्रवर्तक करें कंपनी में ताजा निवेश

प्रवर्तकों द्वारा 2,500 करोड़ रुपये निवेश के बाद ही कर्ज पुनर्गठन पर राजी होंगे बैंक
एस्सार पर कुल 38,800 करोड़ रुपये का है कर्ज
एस्सार स्टील ने बैंकों को दिया है कर्ज पुनर्गठन का प्रस्ताव
कर्ज पुनर्गठन से घट सकती है एस्सार की ब्याज लागत
2019 तक एस्सार स्टील का घाटा कम होकर 900 करोड़ रुपये रहने का अनुमान

बैंकिंग नियमन कानून में संशोधन के कुछ दिनों के अंदर ही भारतीय बैंकों ने एस्सार स्टील के प्रवर्तकों को कंपनी में 2,500 करोड़ रुपये की ताजा इक्विटी निवेश करने को कहा है। बैंकों का कहना है कि ताजा निवेश के बाद ही कर्ज पुनर्गठन के उनके प्रस्ताव पर आगे बढ़ा जाएगा। कंपनी के प्रवर्तक रुइया परिवार द्वारा करीब 2,500 करोड़ रुपये के इक्विटी योगदान के बाद बैंक कंपनी के कर्ज को इक्विटीमें बदलने के प्रस्ताव पर विचार करेंगे। 

एस्सार द्वारा इक्विटी निवेश में निजी इक्विटी फर्मों द्वारा स्टील कंपनी में शेयर के एवज में निवेश भी शामिल है। एस्सार स्टील पर करीब 38,000 करोड़ रुपये का सकल कर्ज है और भारतीय इस्पात उद्योग के संकट में फंसने के बाद कंपनी ने पिछले साल कर्ज पुनर्गठन के लिए आवेदन किया था। एस्सार के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी ने बैंकों को अपना प्रस्ताव सौंपा है और उनकी प्रतिक्रिया का इंतजार है। एस्सार स्टील सहित कुछ अन्य स्टील कंपनियों ने भी बैंकों से फंसी हुई संपत्तियों की टिकाऊ संरचना की योजना (एस4ए) के तहत कर्ज पुनर्गठन की गुहार लगाई है। हालांकि बैंकर कर्ज पुनर्गठन प्रस्तावों को मंजूरी देने में तेजी नहीं दिखा रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि जांच एजेंसियां आने वाले समय में अभियोजन चला सकती हैं जैसा कि आईडीबीआई बैंक के पूर्व चेयरमैन योगेश अग्रवाल के मामले में हुआ।

एस्सार स्टील के लिए कर्ज पुनर्गठन इसलिए भी अहम है क्योंकि वित्त वर्ष 2017 में वह करीब 4,500 करोड़ रुपये की उच्च ब्याज लागत से जूझ रहा है, वहीं इस्पात उद्योग में सुधार के संकेत भी नजर आ रहे हैं। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटी के अनुमान के मुताबिक मार्च 2017 में एस्सार स्टील का घाटा मार्च 2017 के 5,200 करोड़ रुपये से घटकर 3,000 करोड़ रुपये पर आ जाएगा।

कंपनी के मौजूदा वित्त वर्ष के अंत तक घाटा कम कर 1,800 करोड़ रुपये तक लाने की उम्मीद है, वहीं मार्च 2019 तक उसका घाटा 900 करोड़ रुपये ररह सकता है। बैंकरों का अनुमान है कि एस्सार स्टील के कर्ज में थोड़ी कटौती से स्टील कंपनी ब्याज भुगतान में सक्षम हो सकती है और हजीरा संयंत्र की उपयोगिता भी 75 फीसदी तक बढ़ा सकती है। हालांकि कर्ज में कटौती के बारे में बैंकरों ने अभी कोई निर्णय नहीं किया है।

स्टील की कीमतों में तेजी और चीन से सस्ते आयात पर डंपिंग रोधी शुल्क लगाए जाने से घरेलू स्टील उद्योग को मदद मिली है लेकिन बैंकरों का कहना है कि अभी हालात में पूरी तरह से सुधार नहीं हुआ है। भारतीय बैंकों के कुल फंसे कर्ज में स्टील उद्योग की खासी हिस्सेदारी है। इनमें से अधिकांश निवेश पहले ही गैर-निष्पादित आस्तियां बन गईं हैं। एक बैंकर ने कहा कि रुइया के अलावा, कई अन्य करोबारी समूहों को भी संबंधित कंपनियों, खासकर बिजली परियोजनाओं में ताजा इक्विटी निवेश करने को कहा गया है। रुइया समूह कर्ज घटाने के लिए भारत में अपनी संपत्तियों की बिक्री भी कर रहा हैं। समूह ने अपनी रिफाइनरी की बिक्री के लिए रूस की कंपनी रोसनेफ्ट के साथ भी सौदे पर हस्ताक्षर किए हैं।

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