अब आईडीबीआई बैंक कर्ज वसूली पर ध्यान देगा

अभिजित लेले | मुंबई May 28, 2017 09:22 PM IST

फंसे कर्ज के दबाव का सामना कर रहे आईडीबीआई बैंक ने दबाव वाले कर्ज की वसूली में संयोजन की खातिर एक विभाग का गठन किया है, खास तौर से बड़े खातों के दबाव वाले कर्ज के लिए।
बैंक ने कहा, हमारा इरादा मौजूदा वित्त वर्ष में ऐसे कम से कम 5,000 करोड़ रुपये के कर्ज की वसूली व उन्नयन का है। लागत पर नियंत्रण के लिए बैंक कम से कम एक साल के लिए नियुक्तियों पर लगाम कसेगा और आउटसोर्सिंग में कमी लाएगा। साथ ही प्रमुख इमारतों में बैक ऑफिस का कामकाज शिफ्ट करेगा। इस बाबत योजना को अंतिम रूप दे दिया गया है।
बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी एम के जैन ने कहा, अभी कर्ज की वसूली कॉरपोरेट, एसएमई और खुदरा खातों की हो रही है। अब एक विभाग इसका कामकाज संभालेगा, जो इस पर ध्यान केंद्रित करेगा और समयबद्ध कार्रवाई भी करेगा। आने वाले दिनों में और कर्ज को एनपीए में जाने से रोकना हमारी प्राथमिकता है, जो 2015-16 के 19,087 करोड़ रुपये के मुकाबले 2016-17 में 27,575 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। वित्त वर्ष 2017 में कर्ज वसूली व उन्नयन 4,849 करोड़ रुपये का हुआ। प्रबंध निदेशक ने कहा, हमने दबाव वाले कर्ज की तीन श्रेणी की पहचान की है और इस पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। पहला, जहां आईडीबीआई कंसोर्टियम का अगुआ है। ऐसे मामलों में वह सख्ती से वसूली की संभावना तलाशेगा। दूसरा, जहां वह मुख्य रूप से लेनदार है या एसएमई को कर्ज देने के मामले में उसका मल्टी बैंकिंग रिलेशनशिप है। तीसरा, जहां बैंक कंसोर्टियम का कनिष्ट सदसस्य है और जहां किस्मत का फैसला बड़े लेनदार करते हैं।
कंपनी क्षेत्र में दबाव को देखते हुए बैंक इस क्षेत्र में कर्ज में इजाफे को सीमित करेगा। वह खुदरा और प्राथमिकता वाले क्षेत्र में संपत्ति आधार बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेगा। इससे बैंक को जोखिम वाली परिसंपत्तियों का भारांक घटाने और अल्पावधि में पूंजी पर्याप्पता अनुपात सुधारने में मदद मिलेगी।
एक अधिकारी ने कहा, बैंंक पहले ही आरबीआई के त्वरित उपचारात्मक कदम के दायरे में है और वह कुछ सहायक कंपनियों की हिस्सेदारी व रणनीतिक निवेश के मुद्रीकरण की तैयारी कर रहा है। आईडीबीआई बैंक का शेयर लुढ़का है क्योंकि इसने लगातार दूसरे साल शुद्ध नुकसान दर्ज किया है। 31 मार्च को समाप्त वर्ष में इसका शुद्ध नुकसान 5,158 करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2016 में 3,665 करोड़ रुपये रहा था।
बैंक अपने बहुलांश हिस्सेदार केंद्र सरकार के साथ सुधार योजना पर भी बातचीत कर रहा है। मार्च के आखिर में बैंक में सरकार की हिस्सेदारी 73.98 फीसदी थी।

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