खास तरह का मूल्यांकन नहीं कर पाएंगे सेबी पंजीकृत मर्चेंट बैंकर

वीणा मणि और इंदिवजल धस्माना | नई दिल्ली May 30, 2017 09:49 PM IST

अगर कंपनी मामलों के मंत्रालय के मसौदा नियम का क्रियान्वयन होता है तो सेबी के पास पंजीकृत ज्यादातर मर्चेंट बैंकर विभिन्न तरह के मूल्यांकन का काम नहीं कर पाएंगे, मसलन बगैर नकदी के कंपनियों की तरफ से जारी शेयरों का मूल्यांकन या कंपनी कर्ज पुनर्गठन योजना के तहत संपत्ति का मूल्यांकन आदि। कंपनी नियम 2017 के मसौदे (पंजीकृत मूल्यांकनकर्ता व मूल्यांकन) में कहा गया है कि सिर्फ व्यक्ति व साझेदारी फर्म ही मूल्यांकनकर्ता के तौर पर योग्य हैं। इस नियम के मुताबिक, सेबी के पास पंजीकृत ज्यादातर मर्चेंट बैंकर कंपनियां हैं। उनमें से कुछ सीमित दायित्व वाली साझेदारी फर्म हैं, जो मूल्यांकन का काम शायद कर पाएंगे। 
 
जिन अन्य क्षेत्रों में यह नियम प्रभावी हो सकता है उनमें असूचीबद्ध कंपनियों की तरफ से असंबंधित पक्षकारोंं को शेयर जारी किया जाना, दिवालिया की स्थिति में संपत्तियों का मूल्यांकन, नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की तरफ से मंजूर विलय व अधिग्रहण शामिल हैं। चूंकि ये नियम मूल्यांकन के पूरे विस्तार को कवर नहीं करते, बल्कि कंपनी अधिनियम 2013 के तहत होने वाली गतिविधियों तक सीमित है। ऐसे में इनमें मूल्यांकन के क्षेत्र मसलन सेबी, आरबीआई और आयकर अधिनियमों के तहत आने वाले विलय व अधिग्रहण शामिल नहीं हैं। तीन साल पहले जारी मसौदा नियम में सेबी के पास पंजीकृत मर्चेंट बैंकरों को कंपनी अधिनियम 2013 के तहत मान्य मूल्यांकनकर्ता माना गया था।
 
कॉरपोरेट प्रोफेशनल्स कैपिटल के पार्टनर व प्रमुख (मूल्यांकन व सौदे) चंदर साहनी ने कहा, सेबी के पास पंजीकृत 95 फीसदी मर्चेंट बैंकर कंपनियां हैं और सिर्फ पांच फीसदी सीमित दायित्व वाली साझेदार फर्म। पीडब्ल्यूसी के नीरज गर्ग ने कहा, मर्चेंट बैंकरों को मूल्यांकनकर्ता बनने की अनुमति दी जानी चाहिए और मूल्यांकन के विभिन्न नियमों को सुसंगत बनाए जाने की दरकार है।
 
साहनी ने कहा, यह सही दिशा में उठाया गया कदम है, लेकिन इसे सुनिश्चित करना होगा कि इसका जुड़ाव सेबी व आरबीआई के नियमों से हो। कई साल की देरी के बाद ये नियम 15 जुलाई से प्रभावी होने हैं। हालांकि ये नियम अभी मसौदे के रूप मेंं ही हैं, लेकिन इसके क्रियान्वयन के लिए खास तारीख का जिक्र है। इस पर टिप्पणी 27 जून तक दी जा सकती है। साहनी ने कहा, संभवत: ये नियम उन कंपनियों को मूल्यांकन के काम से अलग करते हैं, जिनका सीमित दायित्व होता है। वहीं वैयक्तिक व साझेदारी फर्मों का दायित्व असीमित होता है।
 
यह पूछे जाने पर कि मूल्यांकन के काम से सीमित दायित्व वाली फर्मों को क्यों अलग किए जाने का प्रस्ताव है, विशेषज्ञों ने कहा कि कंपनी मामलों के मंत्रालय को इन मुद्दों को स्पष्ट करना चाहिए। सीमित दायित्व वाली साझेदारी फर्मं में किसी साझेदार के पास दूसरे साझेदारों का दायित्व नहीं होता।
ये नियम कहते हैं कि मूल्यांकन करने वाले अपनी विशेषज्ञता के लिए दायित्व का परित्याग नहीं करना चाहिए। इसका मतलब यह है कि मूल्यांकन करने वाले उनकी तरफ से हुए मूल्यांकन के लिए पूरी तरह से जवाबदेह होंगे। हालांकि नियम कहता है कि मूल्यांकन के लिए कंपनी की तरफ से मुहैया कराए गए आंकड़े उनकी जवाबदेही का हिस्सा नहीं होंगे।
 
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