दरों में कटौती की नहीं किसी को आस

अनूप रॉय | नई दिल्ली Jun 04, 2017 10:25 PM IST

आरबीआई द्वारा दरें नहीं घटाने की संभावना

विकास दर सुस्त पड़ने के बाद मुख्य दरों में कटौती पर चर्चा भले ही तेज हो गई है, लेकिन अर्थशास्त्री मानते हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) दरें नहीं घटाएगा। बिजनेस स्टैंडर्ड ने 12 अर्थशास्त्रियों से बात की है, जिनमें किसी को भी मुख्य दरों में कटौती की उम्मीद नहीं हैं। इनका कहना है कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि के आंकड़े बेशक सुस्त पड़ गए हैं, लेकिन आरबीआई नीतिगत दरों में बदलाव संभवत: नहीं करेगा। वित्त वर्ष 2016-17 की चौथी तिमाही में वृद्धि दर कम होकर 6.1 प्रतिशत रह गई। माना जा रहा है कि पिछले साल नवंबर में नोटबंदी की घोषणा के बाद उपभोग से जुड़े व्यय में कमी आई, जिसका असर वृद्धि दर पर पड़ा।

इस बीच महंगाई में भी सुस्ती दिखी और खाद्य वस्तुओं की कीमतें घटने के बाद खुदरा महंगाई कम होकर 2.99 प्रतिशत रह गई। अच्छे मॉनसून के अनुमान और कच्चे तेल की स्थिर कीमतों को देखते हुए अर्थशास्त्रियों को खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तत्काल तेजी आती नहीं दिख रही है। ऐसे महंगाई दर केंद्रीय बैंक के 4 फीसदी के लक्ष्य से भी कम है।

हालांकि नोटबंदी का असर अस्थायी रहने से वृद्धि दर दोबारा तेज होने की उम्मीद है। डॉयचे बैंक में इंडिया इकनॉमिस्ट कौशिक दास कहते हैं, 'इस समय ज्यादातर लोग दरों में कटौती की बात से इनकार कर रहे हैं। मोटे तौर पर माना जा रहा है कि आरबीआई दरें अपरिवर्तित रखेगा।'

बाकी दूसरे सभी अर्थशास्त्रियों ने कहा कि आरबीआई दरें कम करने में शायद ही जल्दबाजी दिखाएगा। एचडीएफसी बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री अभीक बरुआ का मानना है कि महंगाई का निचला स्तर कुछ महीनों के लिए ही रहेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे में केंद्रीय बैंक दरों को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं दिखाएगा। केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस को भी लगता है कि आरबीआई दरों में किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं करेगा।

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