कृषि ऋण माफी से राजकोषीय सेहत बिगड़ेगी, बढ़ेगी महंगाई

अभिजित लेले | मुंबई Jun 07, 2017 10:01 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आज चेताया कि राज्य सरकारों द्वारा बड़े पैमाने पर कृषि ऋण को माफ किए जाने से देश की राजकोषीय सेहत को नुकसान पहुंचेगा और इससे महंगाई में तेजी आ सकती है। आरबीआई के गवर्नर ऊर्जित पटेल ने कहा कि राज्य सरकारों के बजट में ऋण माफी के लिए गुंजाइश न होने के बावजूद ऐसा करना जोखिमभरा कदम होगा। राज्य सरकारों द्वारा किसानों के बड़े कृषि ऋण माफ किए जाने की घोषणाओं के साथ ही राजकोषीय घाटे में वृद्धि का जोखिम बढ़ गया है।
 
पटेल ने वित्त वर्ष 2018 के लिए मौद्रिक नीति की दूसरी समीक्षा बैठक के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि ऋण माफी की 'फिसलन भरी राह' पर जाने से पिछले दो-तीन साल के दौरान राजकोषीय घाटे से निपटने में राज्यों के योगदान का असर खत्म हो सकता है। इस महीने के आरंभ में महाराष्ट्र सरकार ने अपने राज्य के लघु एवं सीमांत किसानों के ऋण को माफ करने की घोषणा की थी। राज्य सरकार इस ऋण माफी योजना को 31 अक्टूबर से पहले लागू करना चाहती है। 
 
महाराष्ट्र सरकार के इस निर्णय से राज्य में करीब 1.07 करोड़ किसानों को फायदा मिलेगा और इसका लाभ उठाने के लिए राज्य में 5 एकड़ से कम भूमि रखने वाले किसान पात्र होंगे। इस योजना से करीब 30,000 करोड़ रुपये का राजकोषीय बोझ पडऩे का अनुमान है। इसी साल अप्रैल में उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने राज्य के किसानों के करीब 36,000 करोड़ रुपये के ऋण माफ करने की घोषणा की थी। आरबीआई की ही तरह नैशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर ऐंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) ने भी ऋण माफी योजनाओं के दुष्परिणाम के बारे में चेताया था। 
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