एसबीआई: बढ़त को क्यूआईपी से बल

अभिजित लेले | मुंबई Jun 09, 2017 09:36 PM IST

देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने आज कहा कि क्यूआईपी के जरिए जुटाई गई 15,000 करोड़ रुपये की रकम मार्च 2019 तक कारोबारी बढ़त को सहारा देने और बेसल-3 पूंजी की जरूरत के लिए पर्याप्त होगी। बैंक की चेयरमैन अरुंधती भट्टाचार्य ने कहा, इक्विटी पूंजी का आधार उधारी के विस्तार में मदद करेगा। मौजूदा वित्त वर्ष में उधारी में बढ़त की रफ्तार 10-12 फीसदी रहने का अनुमान है जबकि वित्त वर्ष 2019 में यह 14 फीसदी रह सकता है।
 
बैंक की उधारी वित्त वर्ष 2017 में एकल आधार पर 7.8 फीसदी बढ़कर 16,27,273 करोड़ रुपये रही। सहायक बैंकों के कर्ज खाते को जोड़ दें तो विलय के बाद बनने वाले बैंक की उधारी मार्च 2017 के आखिर में 1.42 फीसदी बढ़कर 18,96,887 करोड़ रुपये रही। इश्यू के बाद पूंजी पर्याप्तता अनुपात (विलय के बाद बनी इकाई के लिए) 79 आधार अंक बढ़कर 13.64 फीसदी रही और कॉमन इक्विटी टियर-1 10.20 फीसदी के स्तर पर। एसबीआई ने 287.25 रुपये प्रति शेयर के भाव पर 52.2 करोड़ शेयर बेचकर रकम जुटाई, जो द्वितीयक बाजार में किसी बैंक की तरफ से सबसे ज्यादा शेयर बिक्री का मामला है। एसबीआई ने 5 जून को निजी नियोजन के जरिए शेयर बिक्री शुरू की थी।
 
क्यूआईपी में ज्यादा आवेदन मिला और मांग 27,000 करोड़ रुपये के पार निकल गई। लंबी अवधि के विदेशी संस्थागत निवेशकों की तरफ से 8,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की मांग देखने को मिली। एफआईआई की तरफ से कुल मांग 11,000 करोड़ रुपये के पार निकली। इश्यू का करीब 26 फीसदी लंबी अवधि वाले एफआईआई के पास गया और 25 फीसदी देसी संस्थागत निवेशकों के पास (जिसमें एलआईसी शामिल नहीं है)।
 
एसबीआई की प्रमुख ने कहा कि क्यूआईपी का आवंटन शेयरधारकों के आधार की विविधता में और इजाफा कर रहा है। सहायक बैंकों के साथ विलय के बाद बैंक फिर एक मोड़ पर है, जहां सकारात्मक चीजें महत्वपूर्ण होंगी। भारत में आर्थिक सुधार के साथ ऐसा हो रहा है, यानी दोनों चीजें एक ही समय में हो रही है। इश्यू के बाद विलय वाली इकाई में भारत सरकार की शेयरधारिता 57.07 फीसदी होगी। एलआईसी की हिस्सेदारी बढ़कर 10.4 फीसदी हो जाएगी, जो क्यूआईपी से पहले 8.6 फीसदी थी।
 
संसाधन जुटाने के लिए बैंक कुछ गैर प्रमुख निवेश मसलन नैशनल स्टॉक एक्सचेंज, यूटीआई म्युचुअल फंड की हिस्सेदारी बेचने पर ध्यान केंद्रित करेगा। इस बीच, दबाव वाले क्षेत्र मसलन दूरसंचार में कर्ज घटाने के मसले पर एसबीआई ने कहा कि लेनदारों की तरफ से सख्ती की खबर के बीच हमने कर्ज से लदे दूरसंचार क्षेत्र के लिए अब तक इस्तेमाल न हुए क्रेडिट लाइन को रद्द नहीं किया है। आरबीआई ने हाल में बैंकों से कहा था कि वे दूरसंचार क्षेत्र को दिए गए कर्ज की तत्काल समीक्षा करे, जहां कुल कर्ज करीब 4.6 लाख करोड़ रुपये का है और भविष्य के किसी दबाव के लिए इस बाबत प्रावधान मेंं इजाफा करे। यह क्षेत्र रिलायंस जियो के प्रवेश के बाद शुरू हुई गलाकाट प्रतिस्पर्धा के चलते राजस्व व लाभ में कमी का सामना कर रहा है।
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