बैड बैंक, न्यूनतम आय पर विचार

भाषा | नई दिल्ली Jun 11, 2017 09:30 PM IST

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रविवार को कहा कि वह 2016-17 की आर्थिक समीक्षा में दो अनूठे सुझावों- सभी को न्यूनतम आय योजना यूबीआई और फंसे कर्ज से निपटने के लिए बैड बैंक गठित करने पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि राजनीतिक सीमाओं को देखते हुए फिलहाल यूबीआई का विचार व्यावहारिक नीतिगत विकल्प नजर नहीं आ रहा है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली में एक कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए वित्त मंत्री ने यह भी जोर देकर कहा कि नीति निर्माता विभिन्न विषयों पर अपने ज्ञान का लगातार विस्तार करें। समीक्षा के अनूठे विचारों के बारे में उन्होंने कहा कि यह चुनौती बनी हुई है कि सब्सिडी को कैसे लक्षित तरीके से पहुंचाया जाए। जेटली ने कहा, 'इस साल भी समीक्षा में अहम विचार दिया गया है कि हम कैसे सब्सिडी दें। आखिर पूरी सब्सिडी का विकल्प क्या हो। हम सब्सिडी की जगह सर्वजनीन न्यूनतम आय (लक्षित गरीबों के एक तबके के लिए) को लाना चाहते हैं।' मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम द्वारा तैयार आर्थिक समीक्षा में 'बैड बैंक' का भी विचार दिया गया है जिसमें बैंकों की सभी गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) हो ताकि शेष बैंक प्रणाली अपना काम-काज कर सके। 
 
उन्होंने कहा, 'मैं इन दोनों सुझावों पर उनके साथ चर्चा करता रहा हूं। मैं उनके विचार (यूबीआई) का पूरा समर्थन करता हूं लेकिन भारतीय राजनीति की सीमाओं को देखते हुए मैंने हमेशा उनके समक्ष आशंका जताई है कि हम ऐसी स्थिति में आ जाएंगे जहां लोग संसद में मौजूदा सब्सिडी को जारी रखने के साथ यूबीआई जारी करने की मांग करेंगे। यह ऐसी चीज है जिसका वहन बजट नहीं कर पाएगा।' वित्त मंत्री ने कहा कि बजट से एक दिन पहले पेश की जाने वाली आर्थिक समीक्षा दुष्प्रचार सामग्री नहीं है बल्कि आर्थिक स्थिति की वास्तविकता को रेखांकित करता है। उन्होंने कहा, 'दस्तावेज परंपरागत रूप से तैयार किए जाते रहे हैं लेकिन पिछले दो साल से डा. सुब्रमण्यम और उनकी टीम ने इसे अलग रूप दिया है।' 
 
बैंकों के प्रमुखों से मिलेंगे जेटली
 
वित्त मंत्री अरुण जेटली फंसे कर्ज और उसकी तेजी से वसूली के लिए बैंकों की तरफ से उठाए गए कदमों के बारे में चर्चा के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक प्रमुखों के साथ सोमवार को बैठक करेंगे। बैंकों की गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) 6 लाख करोड़ रुपये से पार कर गया है।  इसके अलावा मंत्री सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंकों के वित्तीय प्रदर्शन की भी समीक्षा करेंगे। चालू वित्त वर्ष में जेटली और बैंक प्रमुखों के बीच यह पहली बैठक है। बैंक नियमन कानून, 1949 में संशोधन के लिए पिछले महीने जारी अध्यादेश के बाद इस प्रकार की यह पहली बैठक है। 
 
सरकार ने इस अध्यादेश के जरिए रिजर्व बैंक को शोधन और फंसे कर्ज की वसूली करने की कार्यवाही शुरू करने के लिए बैंकों को निर्देश देने का अधिकार दिया है। एनपीए संकट के समाधान के लिए और उपायों का वादा किया गया है। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा, 'बैठक के एजेंडे में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) की गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) से संबंधित मुद्दों का समाधान, एमएसई ऋण की स्थिति, स्टैंड अप इंडिया और मुद्रा योजना समेत अन्य मुद्दे शामिल हैं।' इसके अलावा एजेंडे में वित्तीय समावेश और साक्षरता, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और अटल पेंशन योजना समेत अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की समीक्षा शामिल है। पूरे दिन चलने वाली बैठक में साइबर सुरक्षा, बैंक लेन-देन का डिजिटलीकरण, ग्रामीण विकास, कृषि ऋण और शिक्षा ऋण जैसे क्षेत्रों को भी शामिल किया जाएगा। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के क्रियान्वयन में बैंकों की भूमिका और तैयारी पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। जीएसटी एक जुलाई से लागू होने वाला है। 
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