लौट आएगा फंसा हुआ कर्ज!, आरबीआई कर रहा तैयारी

दिलाशा सेठ और अरूप रायचौधरी | नई दिल्ली Jun 12, 2017 09:59 AM IST

... अध्यादेश से एनपीए पर चोट
नए अध्यादेश से बैंकों को फंसे कर्ज का एक हिस्सा वसूलने में मिलेगी मदद
सरकारी बैंकों के साथ बैठक में विलय पर चर्चा नहीं मगर अगले चरण के समेकन की उम्मीद
वित्त मंत्री ने कहा, राज्यों को किसानों की कर्ज माफी योजना अपने संसाधनों से करनी होगी पूरी
फंसे कर्ज के त्वरित समाधान के लिए आरबीआई कर्जदारों की एक सूची तैयार कर रहा है। जल्द ही यह सूची सबके सामने होगी। 
- अरुण जेटली
, केंद्रीय वित्त मंत्री

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) फंसे कर्जों के समाधान के लिए कर्ज नहीं चुकाने वालों की एक सूची तैयार कर रहा है। इससे सरकारी बैंकों को अपने 6 लाख रुपये से अधिक के फंसे कर्ज का एक हिस्सा वसूलने में मदद मिलेगी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आरबीआई और अपने मंत्रालय के अधिकारियों के साथ आज सरकारी बैंकों की नब्ज टटोली और मौजूदा स्थिति का जायजा लिया।

बैठक के बाद जेटली ने कहा, 'हाल में जारी नए अध्यादेश के तहत आरबीआई उन मामलों में लोगों की एक सूची तैयार कर रहा है, जहां इन्सॉल्वेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) के तहत फं से कर्ज समाधान आवश्यक है। जल्द ही यह सूची सार्वजनिक हो जाएगी।' जेटली ने कहा कि केंद्रीय बैंक इस पर काम कर रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि बैठक में बैंकिंग क्षेत्र में विलय पर चर्चा नहीं हुई, लेकिन उन्होंने कहा कि इस विषय पर गंभीरता से विचार हो रहा है। उन्होंने स्थिति की संवेदनशीलता के मद्देनजर किसी का नाम लेने से इनकार किया।

केंद्र ने सरकारी बैंकों के फंसे कर्ज वसूलने के लिए आरबीआई को आवश्यक अधिकार देने के लिए पिछले महीने बैंकिंग नियमन अधिनियम में संशोधन कर एक अध्यादेश जारी किया था। इस अध्यादेश में मुख्य रूप से आरबीआई को बैंकों को दिवालिया संहिता मामलों के लिए इन्सॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन शुरू करने और फंसे कर्ज की वसूली के लिए निर्देश जारी करने का अधिकार दिया गया है।

बैठक में मौजूद आरबीआई के डिप्टी गवर्नर एस एस मूंदड़ा ने कहा कि फंसे कर्जों वाले खाते की पहचान के लिए एक आंतरिक सलाहकार समिति गठित की गई है। आरबीआई कुछ खास बड़े खातों और अन्य आवश्यक चीजों पर बैंकों से सूचनाएं जुटा रहा है। इन्सॉल्वैंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड के तहत करीब 81 मामले दायर हुए हैं आर इनमें 18 मामलों पर वित्तीय कर्जदाताओं ने पहल की है। 

जेटली ने कहा, 'ये मामले राष्ट्रीय कंपनी कानून पंचाट में विचाराधीन हैं। चूंकि, कुल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों का 70 प्रतिशत हिस्सा समूहों या बैंकिंग से लेन-देन की विभिन्न व्यवस्थाओं में फंसा है, इसलिए इनका जल्द समाधान होना जरूरी है।' वित्त मंत्री ने कहा कि कुछ बैंकों ने एनपीए अध्यादेश के तहत ऋण वसूली के लिए उपलब्ध बुनियादी ढांचे को लेकर चिंता जताई। बैठक में सरकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति, एनपीए समाधान, सभी वित्तीय समावेशन की समीक्षा और साइबर-सुरक्षा पर भी चर्चा हुई। बड़ी तादाद में कर्ज एनपीए में तब्दील होने से बैंकों के मुनाफे पर खासा असर पड़ा है। उदाहरण के लिए बैंकों ने वित्त वर्ष 2016-17 में 1.5 करोड़ रुपये का परिचालन मुनाफा दर्ज किया लेकिन प्रावधान संबंधी विभिन्न आवश्यकताओं के कारण शुद्ध मुनाफा महज 574 करोड़ रुपये रहा। 

राज्य खुद करें कर्ज माफी

किसानों के कर्ज माफ करने के मुद्दे पर जेटली ने कहा कि जो राज्य यह कदम उठाएंगे उन्हें अपने संसाधनों से ही रकम की व्यवस्था करनी होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र राज्यों की इस योजना में साथ नहीं आएगा। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र ने किसानों के कर्ज माफ करने की घोषणा की है।
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