सरकारी बैंकों का एकीकरण : फिर होगा छोटे बैंकों का मेल

दिलाशा सेठ और इंदिवजल धस्माना | नई दिल्ली Jun 14, 2017 09:51 AM IST

एकीकरण की राह पर बैंक

भारतीय स्टेट बैंक में 5 सहयोगी बैंकों के विलय के बाद सरकारी बैंकों के एकीकरण के अगले दौर में बैंक ऑफ बडौदा और केनरा बैंक अगले एकाध महीने में कुछ छोटे बैंकों का अधिग्रहण कर सकते हैं। इनमें देना बैंक, विजया बैंक, यूको बैंक और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया शामिल हो सकते हैं। सरकार 6-7 बैंकों के साथ चर्चा कर रही है ताकि  विलय के लिए उनकी थाह ली जा सके।

एक सरकारी अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, 'इस चर्चा का मकसद यह देखना है कि  किसका किसके साथ तालमेल बैठता है क्योंकि एकीकरण से बैंक मजबूत होने चाहिए और बुनियादी मकसद पूरा होना चाहिए। हमें लगता है कि एकाध महीने में इससे कुछ निकलकर आएगा।' अधिकारी ने कहा कि बैंक ऑफ बडौदा और केनरा बैंक बड़े बैंक हैं और वे कुछ छोटे बैंकों का अधिग्रहण कर सकते हैं। देना बैंक और विजया बैंक का विलय किया जा सकता है। बैंक ऑफ इंडिया अब भी नुकसान में चल रहा है और भविष्य में इससे संभावना हो सकती है। लेकिन फिलहाल यह छोटे बैंक का अधिग्रहण करने के लिए फिट नहीं है।

इसी तरह एकीकरण प्रक्रिया में पंजाब नैशनल बैंक और सिंडिकेट पर फिलहाल कोई चर्चा नहीं हो रही है। एकीकरण के मानकों में बैंक की वित्तीय स्थिति, फंसे कर्ज की स्थिति, भौगोलिक आधार, मानव संसाधन एकीकरण और तकनीकी एकीकरण शामिल है। यह इसलिए अहम है क्योंकि अधिकांश सरकारी बैंकों का कर्ज इस समय बिजली, स्टील, कपड़ा और बुनियादी क्षेत्र में फंसा हुआ है।

इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक अन्य अधिकारी ने कहा, 'हम केवल बैलेंस शीट ही नहीं देख सकते हैं। हमें उनके फंसे कर्ज की स्थिति भी देखनी होगी क्योंकि कर्ज के पुनर्गठन की 18 महीने की समयसीमा समाप्त हो रही है। हमें बैंकों को मजबूत बनाने की जरूरत है अन्यथा पूंजी आवश्यकता बहुत बढ़ जाएगी।' विलय किए जाने वाले बैंक की फंसी परिसंपत्तियों पर इस चर्चा में बहुत अहमियत दी जा रही है क्योंकि एकीकरण से मजबूत बैंक पर बोझ नहीं पडऩा चाहिए। सरकारी बैंकों का कुल फंसा कर्ज यानी गैर निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) 6 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच चुका है। अधिकारी ने कहा, 'इस कदम का मूल मकसद यह है कि एकीकरण के बाद बनने वाला बैंक इतना मजबूत होना चाहिए कि वह भविष्य के झटके को सहन कर सके।' 

एकीकरण के तहत एक या दो छोटे बैंकों का किसी बड़े बैंक में विलय किया जा सकता है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को कहा था कि बैंकिंग क्षेत्र में एकीकरण के मुद्दे पर सक्रियता से विचार किया जा रहा है लेकिन उन्होंने किसी बैंक का नाम लेने से इनकार कर दिया था क्योंकि इससे शेयर मूल्य आदि पर प्रभाव पड़ सकता है। एनपीए से सरकारी बैंकों का शुद्ध मुनाफा प्रभावित हो रहा है। उदाहरण के लिए बैंकों ने वर्ष 2016-17 में 1.5 लाख करोड़ का स्थायी परिचालन लाभ कमाया था लेकिन कर्ज के लिए विभिन्न प्रावधानों के कारण उनका शुद्घ मुनाफा केवल 574 करोड़ रुपये रहा। 

अधिकारियों का कहना है कि कौन बैंक किस बैंक का अधिग्रहण करेगा, इसका फैसला बैंकों पर ही छोड़ा जाएगा। एक अधिकारी ने कहा, 'बैंक कामकाज में तालमेल सहित विभिन्न मुद्दों को देखेंगे और फिर फैसला करेंगे कि किस बैंक का किसमें विलय होगा। सरकार इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करेगी।' अधिकारी ने कहा कि विलय के बाद की छंटनी होगी और कुछ शाखाओं को बंद किया जाएगा। लेकिन किसी की नौकरी नहीं जाएगी।
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