एयू स्मॉल फाइनैंस बैंक: शानदार रिकॉर्ड से मदद

हंसिनी कार्तिक |  Jun 25, 2017 09:57 PM IST

एयू स्मॉल फाइनैंस बैंक के नाम से चर्चित एयू फाइनैंसर अक्टूबर 2015 में सुर्खियों में रही थी। यह उन 10 नामों में एकमात्र परिसंपत्ति आधार गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) थी जिन्हें एसएफबी या स्मॉल फाइनैंस बैंक लाइसेंस दिए गए थे। लाइसेंस प्राप्त करने वाली 9 अन्य कंपनियां सूक्ष्म वित्तीय संस्थान (एफएफआई) थीं। इससे काफी हद तक कंपनी की उसके आईपीओ में दिलचस्पी का संकेत मिलता है। जो बात इस दिलचस्पी को बयां करती है, वह है एयू की एक असंगठित क्षेत्र की ऋणदाता से एक क्षेत्रीय एनबीएफसी में तब्दील होने और अब एसएफबी कनने की क्षमता।

 
परिचालन
 
इसने वाहनों के लिए ऋण मुहैया कराने के लिए 1996 में व्यवसाय शुरू किया था और 2005 में उसने एचडीएफसी बैंक के साथ भागीदारी की। तब से उसने कई दौर की निजी इक्विटी फंडिंग में सफलता हासिल की है। मोतीलाल ओसवाल ने शुरुआती चरण में इसे समर्थन दिया, वारबर्ग पिंकस, आईएफसी, क्रिसकैपिटल और केदारा ने वृद्घि के बाद के चरणों में इसमें निवेश किया।
 
कई निवेशकों ने एयू पर अपना ध्यान गंभीरता से केंद्रित किया है। जहां सुविधाओं से वंचित वर्ग की जरूरत पूरी करना इसका प्रमुख सिद्घांत रहा है, वहीं छोटे और मझोले उद्यमों (एसएमई) और माइक्रो एसएमएई यानी एमएसएमई अब इसके फोकस एरिया में मुख्य रूप से शामिल हैं। एमएसएमई के लिए औसत ऋण 10-11 लाख रुपये और एसएमई के लिए 2 करोड़ रुपये है। ये दो व्यवसाय सालाना 55 प्रतिशत और 78 प्रतिशत की प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियों (एयूएम) के साथ एयू के लिए तेजी से बढ़ रहे स्रोत हैं। एनबीएफसी एक मजबूत हाउसिंग लोन पोर्टफोलियो से भी संपन्न रही है, जिसे एसएफबी मानकों को ध्यान में रखकर 2016 में घटाकर आधा कर दिया गया। भविष्य में आवास ऋण एसएफबी के लिए पर्सनल लोन और गोल्ड लोन के अलावा एक नया सेगमेंट होगा। 
 
वित्तीय स्थिति
 
जहां इसकी एयूएम वित्त वर्ष 2013 के 3,704 करोड़ रुपये से बढ़कर 2017 में 10,734 करोड़ रुपये हो गई वहीं इसके लाभ और आय में भी समान रूप से तेजी दर्ज की गई। कंपनी को अपने आवास वित्त व्यवसाय की बिक्री से प्राप्त 516 करोड़ रुपये के मुनाफे से भी मदद मिलेगी। 2016 में इस मुनाफे और कोष उगाही के समावेश से इसका पूंजी पर्याप्तता अनुपात मार्च के अंत में बढ़कर 23.2 फीसदी हो गया था।
 
हालांकि ये आंकड़े सकारात्मक बदलाव के नजरिये से पर्याप्त हैं, लेकिन निवेशकों को अगले 12-18 महीनों के लिए बनाई गई विस्तार योजनाओं से भी अवगत होने की जरूरत है। उदाहरण के लिए, एसएफबी का उद्देश्य वित्त वर्ष 2018 में 168 शाखाएं खोलना है। यदि उज्जीवन और इक्विटास के मामलों पर विचार करें तो आपको अधिक परिचालन खर्च के कारक पर विचार करने की जरूरत है। इससे आने वाले वर्षों में राजस्व और मुनाफा वृद्घि की रफ्तार प्रभावित होगी। इक्विटास और उज्जीवन के लिए खर्च-आय अनुपात वित्त वर्ष 2016 के 51 फीसदी से बढ़कर वित्त वर्ष 2017 में 54 फीसदी और वित्त वर्ष 2016 के 53 फीसदी से बढ़कर वित्त वर्ष 2017 में 63 फीसदी हो गया। बदलाव का दौरान बरकरार रहने से यह अनुपात वित्त वर्ष 2018 में और बढ़ सकता है।
 
मूल्यांकन
 
आईपीओ के बाद के आधार पर 5.3 पर वित्त वर्ष 2017 का प्राइस टु बुक रेशियो के साथ एसएफबी अपने कई सूचीबद्घ प्रतिस्पर्धियों (जैसे, उज्जीवन, इक्विटास, कैपिटल फस्र्ट और श्रीराम सिटी यूनियन) की तुलना में महंगा दिख रहा है। ये वित्त वर्ष 2017 के प्राइस-टु-बुक के दो और चार गुना के बीच कारोबार कर रहे हैं। आय में संभावित कमी को देखते हुए एसएफबी की ऑफर कीमत महंगी दिख रही है। इन मूल्यांकन पर प्रभुदास लीलाधर के विश्लेषकों का कहना है कि उन्होंने निवेशकों को लंबी अवधि के निवेश लक्ष्य के साथ इस शेयर को खरीदने का सुझाव दिया है। 
 
जोखिम
 
राजस्थान (एयूएम का 54 फीसदी) पर ज्यादा ध्यान देना प्रमुख जोखिम है। इसके अलावा, बैंकों से 33 प्रतिशत मियादी ऋणों के साथ इसकी संभावना है कि एसएफबी में तब्दील होने के बाद कंपनी की बैंकिंग चैनलों का लाभ उठाने की दक्षता नियामकीय सख्ती की वजह से काफी हद तक सीमित हो सकती है। 
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