लॉकर से गुम सामान, क्या हो समाधान

संजय कुमार सिंह |  Jun 28, 2017 10:07 PM IST

अगर आपने किसी बैंक में लॉकर ले रखा है और मान लीजिए कि इससे कोई सामान चोरी हो जाए या कोई इसका ताला तोड़कर आपका कीमती समान या जेवर या फिर कोई अहम दस्तावेज चुरा ले तो आप क्या करेंगे? अगर आप यह उम्मीद करते हैं कि बैंक आपके किसी नुकसान की भरपाई करेगा तो फिर आप गलतफहमी में हैं। बैंक का रवैया जानकर आपको झटका लग सकता है क्योंकि आपके इस तरह के किसी नुकसान के लिए बैंक कतई जिम्मेदार नहीं हैं। 

 
हाल में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी गई तो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और कई बैंकों ने दो टूक कह दिया कि लॉकर में रखी किसी वस्तु के चोरी होने पर वे जिम्मेदार नहीं हैं। बैंकों की दलील है कि जहां तक लॉकर सुविधाओं की बात है तो बैंक और ग्राहक के बीच संबंध मकान मालिक और किरायेदार जैसा है। लिहाजा, मकान में रखे सामान की सुरक्षा के लिए जिस तरह किरायेदार जिम्मेदार है, उसी तरह लॉकर के मानान की जिम्मेदारी भी किरायेदार की ही है। चूंकि, बैंक नुकसान की भरपाई नहीं करेंगे, इसलिए लॉकर का जोखिम कम कैसे किया जाए, इसकी जिम्मेदारी ग्राहक को ही लेनी होगी।
 
इसके लिए जिन बातों पर ध्यान देना जरूरी है, उनमें सबसे पहले है बैंक का चयन। यानी बैंक का चुनाव सोच समझकर करना होगा। मसलन बैंक घनी आबादी वाले क्षेत्र या शहर के मध्य में होना चाहिए। दूर-दराज और निर्जन क्षेत्र के बैंक में लॉकर लेने की गलती न की जाए। हाल में उत्तर भारत में चोर उस बैंक में घुस गए जो एक बंद फैक्टरी के निकट था। लॉकर में अपनी मूल्यवान वस्तुएं जमा करने से पहले सारे सामान की एक एक विस्तृत सूची तैयार कर लें। गेटिंग यू रिच के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी रोहित शाह कहते हैं, 'अगर किसी एक लॉकर में रखी बेशकीमती वस्तुओं का कुल मूल्य अधिक है तो फिर ऐसे कीमती मामान को दो हिस्सों में बांट लीजिए और इन्हें दो अलग-अलग बैंकों में रखें। हर तीन से छह महीने में एक बार लॉकर जरूर खोलें और सामन चैक करें।'
 
केवल पहने जाने वाले सोने को आभूषण के रूप में रखें। शाह कहते हैं, 'निवेश के लिए जमा सोना वित्तीय साधनों जैसे सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड, ई-गोल्ड या एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) के तौर पर रखें। इससे जोखिम कम हो जाता है। बुजुर्गो के लिए एक विकल्प यह हो सकता है कि वे अपने आभूषणों को केवल एक लॉकर में रखने के बजाय इनको अपने उत्तराधिकारियों के बीच बांट दें। ' लॉकर में रखे सामान को लेकर बैंकों की कोई जिम्मेदारी न होने की खबर सुनने के बाद हो सकता है कुछ लोग अपने आभूषणों का कुछ हिस्सा घरों में ही रखना पसंद करें। अगर ऐसी बात है तो फिर इन गहनों का बीमा जरूर करवा लें। 
 
जेएलटी इंडिपेंडेंट इंश्योरेंस ब्रोकर्स में उप मुख्य कार्याधिकारी अरविंद लड्ढा कहते हैं, 'घर में रखे आभूषणों का बीमा आसानी से हो सकता है। बस आपको इसकी घोषणा करनी होगी। आभूषण से संबंधित मूल्यांकन प्रमाणपत्र लेना होगा। इसके बाद गृह बीमा पॉलिसी के तहत इनका बीमा हो जाएगा।' यह बात ध्यान में रखें कि बैंक लॉकर में रखे आभूषणों का बीमा नहीं होता है। लड्ढा कहते हैं, 'इसकी वजह यह है कि बैंक  को नहीं पता कि ग्राहक ने किसी तरह की कीमती वस्तु लॉकर में रखी है।' आभूषण के अलावा लोग महत्त्वपूर्ण दस्तावेज भी लॉकर में रखते हैं। आप चाहें तो इनको डिजिटल करके ई-लॉकर में रख सकते हैं।  इससे कागजात खो जाने के बाद भी आप इनका स्वामित्व साबित करने में सक्षम होंगे।
 
लॉकर से सामान गायब होने पर कौन जिम्मेदार
 
उपभोक्ता अधिकार विशेषज्ञों का मानना है कि बैंक लॉकर में पड़े सामान के गायब होने या क्षतिग्रस्त होने के मामले में बैंक अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं। उनका कहना है कि बैंकों द्वारा इसके लिए दायित्व नहीं लेना 'सेवा में खामी' के तहत आता है। भारतीय रिजर्व बैंक और कई अन्य बैंकों ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में कुछ दिन पहले कहा था कि लॉकर में कीमती सामान के नुकसान पर कोई मुआवजा नहीं बनता। सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंकों के अधिकारी इसकी जिम्मेदारी ग्राहकों पर डाल रहे हैं। उनका कहना है कि ग्राहक यह नहीं बताते कि उन्होंने सेफ डिपॉजिट बॉक्स में क्या सामान रखा है।
 
बैंक अधिकारियों का कहना है कि बैंकों द्वारा प्रदान किए गए सुरक्षा कवच से अलग सेंधमारी ग्राहक और बैंक के बीच करार के दायरे में नहीं आती। रिजर्व बैंक और 19 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने आरटीआई के जवाब में कहा है कि लॉकर में रखे सामान को लेकर हुए नुकसान की जिम्मेदारी उनकी नहीं है। चाहे यह नुकसान आग लगने या किसी प्राकृतिक आपदा की वजह से क्यों न हो। 
 
 उपभोक्ता विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में पारदर्शिता जरूरी है क्योंकि बैंक इस आधार पर अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं कि लॉकर में रखे सामान की जानकारी उन्हें नहीं होती। पारदर्शिता होने पर बैंक लॉकर के सामान का भी बीमा कर सकेंगे। विशेषज्ञों की राय से असहमति जताते हुए बैंक अधिकारियों का कहना है कि लॉकर में सामान रखने के लिए जो वार्षिक शुल्क लिया जाता है वह सिर्फ 'सुरक्षित रखने' के लिए होता है। 
 
हालांकि बैंकरों ने यह नहीं बताया कि सुरक्षित रखने से क्या तात्पर्य है। उपभोक्ता अधिकार विशेषज्ञ और कंज्यूमर आनलाइन फाउंडेशन के संस्थापक बेजॉन मिश्रा ने कहा कि सरकार, रिजर्व बैंक और बैंकिंग उद्योग इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। वे उपभोक्ताओं से पैसा लेते हैं लेकिन सेवाओं की गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। उपभोक्ता मामलों को देखने वाले वकील कुश शर्मा का कहना है कि बैंकों को लॉकर के सामान का बीमा कराने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। इस उद्देश्य के लिए यह पारदर्शिता जरूरी है कि लॉकर में क्या रखा गया है। खासकर यह देखते हुए कि सरकार सभी वित्तीय गतिविधियों में पारदर्शिता लाना चाहती है।
कीवर्ड bank, locker,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक