रिजर्व बैंक से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद

अनूप रॉय और इंदिवजल धस्माना | मुंबई/नई दिल्ली Jul 13, 2017 10:18 PM IST

आगामी मौद्रिक समीक्षा 2 अगस्त को

कई अर्थशास्त्रियों और बैंकरों का मानना है कि औद्योगिक उत्पादन की धीमी रफ्तार और खुदरा महंगाई में कमी से जुड़े हालिया आंकड़ों ने 2 अगस्त की आगामी मौद्रिक समीक्षा में आरबीआई के लिए दरों में कटौती की गुंजाइश छोड़ी है। जो यह सोचते हैं कि आरबीआई दरों में कटौती करेगा, वे यह भी कह रहे हैं कि उधारी लागत कम होने से निवेश या उधारी की रफ्तार (जो 2016-17 में 40 साल के निचले स्तर 5.1 फीसदी पर रह गई) एक झटके में बहाल नहीं हो पाएगी।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक मई में 1.7 फीसदी पर पहुंचा, जो अप्रैल के 2.8 फीसदी से कम है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई जून में 1.5 फीसदी के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई, जो इससे पूर्व माह में 2.2 फीसदी रही थी। एसबीआई समूह के मुख्य अर्थशास्त्री सौम्य कांति घोष ने कहा, इस बार दरें न घटाने के लिए कारण खोजने में आरबीआई को काफी मुश्किल होगी। आरबीआई दरों में कम से कम 25 आधार अंकों की कटौती करेगा। हालांकि इसे दरों में 50 आधार अंकों की कटौती करनी चाहिए या संकेत देना चाहिए और अक्टूबर की समीक्षा में दरें 25 आधार अंक और घटाना चाहिए।

घोष ने कहा, खुदरा महंगाई जुलाई में भी दो फीसदी से नीचे रहेगी, जो अगस्त में तीन फीसदी के आसपास पहुंचेगी। एक बैंकर ने कहा, इसमें संदेह नहीं है कि आरबीआई को इस बार दरें घटानी होगी, जो तत्परता से बैंकों की तरफ से भी आगे बढ़ाया जाता है। हालांकि उधारी में तब बढ़ोतरी होगी, जब मांग जोर पकड़ेगी। एक बड़े सरकारी बैंक के कार्यकारी निदेशक ने कहा, कंपनियों ने वाणिज्यिक प्रतिभूतियों व कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार के तौर पर वैकल्पिक स्रोत तलाश लिया है। बैंकों को इस वास्तविकता के साथ रहना होगा कि कर्ज का बाजार उस स्तर पर दोबारा नहीं पहुंचेगा। कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार हालांकि पर्याप्त गहराई वाला नहीं है और शायद यह लंबी अवधि की परियोजनाओं की फंडिंग नहीं कर पाएगा। बैंकों की उधारी की रफ्तार जोर पकड़ेगी, लेकिन मौजूदा आर्थिक परिदृश्य में यह शायद ही हो पाएगा।

एक अन्य बैंकर ने कहा, मोटे तौर पर एसबीआई व कुछ निजी बैंकों के चलते बैंकों की उधारी की रफ्तार सकारात्मक है। एक अन्य सरकारी बैंंक के कार्यकारी निदेशक ने कहा, कई बैंकों खाते मजबूत नहीं हो पाए हैं। बैंक फंसे कर्ज के समाधान में व्यस्त हैं और कंपनियां अपने कर्ज के भुगतान में व्यस्त हैं। दिवालिया प्रक्रिया के इस दौर में उधारी की रफ्तार मेंं उछाल की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए।
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