बैंकों को करना होगा 18,000 करोड़ रु. का प्रावधान

निखत हेतवकर | मुंबई Jul 18, 2017 09:51 PM IST

दिवालिया समाधान के लिए पहचान किए गए 12 बड़े फंसे कर्ज वाले खातों के लिए भारतीय बैंकों को कम से कम 18,000 करोड़ रुपये का प्रावधान करना पड़ेगा। यह कहना है इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च का। जून 2017 में भारतीय रिजर्व बैंक ने लेनदारों से कहा था कि वे दिवालिया संहिता के तहत 12 खाते नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ले जाएं। रेटिंग एजेंसी का अनुमान है कि इन खातों के लिए औसत प्रावधान अभी 42 फीसदी है। 
 
अतिरिक्त प्रावधान मौजूदा वित्त वर्ष में लेनदार बैंकों के मुनाफे में 25 फीसदी की कमी लाएगा और संपत्तियों पर रिटर्न 12 आधार अंक घटाएगा। पहचाने के 12 खाते के लिए औसतन 50 फीसदी का प्रावधान करने वाले बैंकों को प्रावधान की नई अनिवार्यता को पूरा करने के लिए अतिरिक्त प्रावधान करना होगा, जो हर खाते के लिए 50 फीसदी बैठता है। दिवालिया प्रक्रिया के लिए पहचानी गई कंपनियों में एस्सार स्टील, भूषण स्टील, आलोक इंडस्ट्रीज, लैंको इन्फ्राटेक और एमटेक ऑटो शामिल हैं।
 
मध्यम आकार वाले सरकारी बैंकों के लिए इंडिया रेटिंग्स का परिदृश्य नकारात्मक है क्योंंकि इनके ऊपर अतिरिक्त प्रावधान का बोझ इनकेलाभ-हानि खाते पर दबाव बढ़ा देगा। अतिरिक्त प्रावधान की दरकार से कुछ बड़े सरकारी बैंकों के लाभ पर वित्त वर्ष 2018 में असर पड़ेगा, जो उनकी एकल रेटिंग पर जोर दे रहा है। कुल 18,000 करोड़ रुपये के प्रावधान में से दबाव वाला लोहा व इस्पात क्षेत्र करीब 10,500 करोड़ रुपये का योगदान करता है जबकि बुनियादी ढांचा क्षेत्र 4,100 करोड़ रुपये का।
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