आरबीआई ने रीपो दर 0.25 % घटाकर 6 % की, कर्ज होगा सस्ता

अनूप रॉय और सुब्रत पांडा | मुंबई Aug 02, 2017 10:02 PM IST

आगे का रुख मुद्रास्फीति की चाल पर निर्भर

मौद्रिक नीति समीक्षा की मुख्य बातें :
रिवर्स रीपो भी 25 आधार अंक घटकर 5.75 फीसदी
खुदरा मुद्रास्फीति को सतत आधार पर 4 फीसदी पर रखने पर जोर
चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि का अनुमान 7.3 फीसदी पर बरकरार
निजी निवेश, बुनियादी ढांचे की बाधाओं को दूर करने तथा प्रधानमंत्री आवास योजना पर विशेष जोर देने की जरूरत
कृषि ऋण माफी से राजकोषीय लक्ष्य बिगड़ने और सार्वजनिक व्यय की गुणवत्ता घटने का जोखिम
बैंकों और कंपनियों की बैलेंस शीट की कमजोरी से नए निवेश के प्रभावित होने की आशंका
एमपीसी की अगली बैठक 3-4 अक्टूबर को

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आज नीतिगत दर में 25 आधार अंक की कटौती की और संकेत दिया कि आगे के कदम मुद्रास्फीति, घरेलू कारकों तथा राज्यों द्वारा कृषि ऋण माफी योजना के क्रियान्वयन के रुख पर निर्भर करेंगे। छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति ने पाया कि मुद्रास्फीति भले ही निचले स्तर पर पहुंच गई हो लेकिन इसके बढ़ने का जोखिम बना हुआ है।

आरबीआई द्वारा रीपो दर में 25 आधार अंक की कटौती कर इसे 6 फीसदी कर दिया गया है, साथ ही अपना रुख तटस्थ रखते हुए संकेत दिया है कि मुद्रास्फीति को हिसाब से आगे दरों में कमी या बढ़ोतरी पर विचार किया जाएगा। आरबीआई के गवर्नर ऊर्जित पटेल ने कहा, 'दर में कटौती उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर की गई है।' हालांकि डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कह कि फिलहाल वित्तीय और कॉरपोरेट क्षेत्र की इकाइयों की बैलेंस शीट की समस्या का समाधान आरबीआई की शीर्ष प्राथमिकता बनी रहेगी।

मौद्रिक नीति समिति के 6 सदस्यों में से 5 दर में कटौती का पक्ष लिया। पिछली बार की तरह ही इस बार भी रवींद्र ढोलकिया ने 50 आधार अंक की कटौती की बात कही। लेकिन आरबीआई के कार्यकारी निदेशक माइकल पात्रा ने यथास्थिति बनाए रखने के पक्ष में मत दिया। आचार्य ने कहा कि 1.75 फीसदी की वास्तविक ब्याज दर के लिहाज से केंद्रीय बैंक सहज स्थिति में था। वास्तविक ब्याज दर का मतलब ब्याज दर और मुद्रास्फीति में अंतर से है। ऐसे में नीतिगत दर 6 फीसदी करने का मतलब है कि मुद्रास्फीति 4 फीसदी से थोड़ा अधिक रहने का अनुमान लगाया गया है।

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने सोमवार को ही बचत खातों पर जमा दर में 50 आधार अंक की कटौती कर दी है, वहीं आरबीआई गवर्नर ने कहा कि आवास और वाहन ऋण को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में बैंकों ने दरें नहीं घटाई हैं। पटेल ने कहा, 'बैंकों द्वारा कर्ज की दरों में कटौती की अभी गुंजाइश बनी हुई है क्योंकि उन्होंने कटौती का पूरा लाभ ग्राहकों को नहीं पहुंचाया है।' एसबीआई की चेयरमैन अरुंधती भट्टाचार्य और आईसीआईसीआई बैंक की प्रमुख चंदा कोछड़ आगे दरों में कटौती को लेकर किसी तरह की प्रतिबद्धता नहीं जताई है।

हालांकि येस बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी राणा कपूर ने कहा कि आने वाले महीनों में कर्ज की दर में 50 से 75 आधार अंक की कटौती संभव है। आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि देश की संभावनाओं तथा स्थिरता एवं नरम मुद्रास्फीति के साथ सतत विकास के लिए दर में कटौती महत्त्वपूर्ण और जरूरी कदम है। हालांकि अर्थशास्त्रियों के बीच इसे लेकर एकमत नहीं है कि आगे दरों में और कटौती नहीं होगी।

डॉयचे बैंक के भारत में मुख्य अर्थशास्त्री कौशिक दास ने कहा, 'यह स्पष्टï है कि मध्यम अवधि में मुद्रास्फीति के परिदृश्य को लेकर आरबीआई ने अपेक्षाकृत सतर्क नजरिया को बरकरार रखा है। ऐसे में आगे दरों में कटौती की संभावना कम ही है।' हालांकि बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच के भारत में अर्थशास्त्री इंद्रनील सेनगुप्ता ने कहा कि दिसंबर तक दर में 25 आधार अंक की और कटौती हो सकती है लेकिन बैंकों को ताजा कटौती का पूरा लाभ ग्राहकों को देना होगा।

केंद्रीय बैंक ने महंगाई पर अपना अनुमान बरकरार तो रखा है, लेकिन तत्काल भविष्य में महंगाई की चाल पर खुलकर कुछ कहने से परहेज किया है। आरबीआई ने पहली छमाही में इसके 2.0 से 3.5 प्रतिशत के बीच और दूसरी छमाही में 3.5 से 4.5 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान जताया है। महंगाई की चाल निर्धारित करने में हाउस रेंट अलावेंस (एचआरए), वस्तुओं की संशोधित कीमतें और खाद्य महंगाई पर असर डालने वाली बातों की अहम भूमिका हो सकती है।

कुछ राज्यों ने किसानों के कर्ज माफ करने की घोषणा की है, जिससे वित्तीय अनुशासन बिगड़ सकता है, जिसका सीधा असर सार्वजनिक  खर्च पर पड़ेगा। केंद्रीय ने बैंक ने कहा है, 'केंद्र की तरह ही अगर राज्यों ने वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी लागू करने का फैसला किया तो अगले 18 से 24 महीनों में मुख्य महंगाई दर में अतिरिक्त 100 आधार अंक बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।'

पटेल ने शुरुआती प्रतिक्रिया में कहा कि एचआरए को शामिल न करें तो मुख्य महंगाई दर चौथी तिमाही तक 4 प्रतिशत से थोड़ी अधिक रहेगी, जबकि इसे जोडऩे पर आंकड़ा 4.5 प्रतिशत तक चला जाएगा। अच्छा मॉनसून और खाद्य एवं ईंधन को छोड़कर बाकी वस्तुओं की कीमतों में नियंत्रित बढ़ोतरी सहायक सिद्ध हो सकते हैं। आरबीआई ने आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान में कोई बदलाव नपहीं किया है और इसे 7.3 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। हालांकि इसने कहा कि उद्योग और सेवा क्षेत्रों में तेजी थोड़ी कमजोर रह सकती है। मौद्रिक नीति भाषण में कहा गया है, 'मौद्रिक नीति समिति का मानना है कि निजी क्षेत्र से निवेश में तेजी लाए जाने की तत्काल जरूरत है। इसके साथ ही बुनियादी क्षेत्र की बाधाएं दूर कर सरकार की सस्ती आवास योजना में जान फूंकने की जरूरत है।'
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