नए बेंचमार्क को लेकर बैंकर सतर्क

अभिजित लेले और निखत हेतवकर | मुंबई Aug 09, 2017 09:48 PM IST

कर्ज की दरों को बाजार से तय होने वाले बेंचमार्क से संबंधित करने संबंधी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की पहल का स्वागत करते हुए बैंकरों ने कहा है कि वे परिसंपत्ति-दायित्व में अंतर से निपटने के लिए जोखिम कम करने वाले उपाय तलाशने के मद्देजर नई व्यवस्था की ओर धीरे-धीरे कदम बढ़ाने के पक्ष में हैं। ऋण के लिए मौजूदा व्यवस्था- पूंजी की सीमांत लागत आधारित उधारी दर (एमसीएलआर)- बाजार द्वारा निर्धारित दरों से अधिक दूर नहीं हैं।
 
सरकारी, निजी और विदेशी बैंकों के वरिष्ठï अधिकारियों ने कहा, 'परिसंपत्ति के मोर्चे पर दरों में लगातार हो रहे बदलाव के बीच हमें इस तथ्य को ध्यान में रखना होगा कि भारत में आमतौर पर निर्धारित दरोंं पर जमा की जाती है। ऐसे में सख्ती बढ़ जाती है और चालाकी की गुंजाइश कम होती है।' बैंकरों ने कहा कि रिजर्व बैंक की इस पहल से पारदर्शिता बढ़ेगी और वित्तीय क्षेत्र एवं रियल एस्टेट क्षेत्र (उधारकर्ताओं) के लिए भी समान बेंचमार्क निर्धारित होंगे। इससे डेरिवेटिव्स सहित जोखिम प्रबंधन के उपाय विकसित करने में भी मदद मिलेगी। स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के क्षेत्रीय प्रमुख (वित्तीय बाजार- आसियान एवं दक्षिण एशिया) अनंत नारायण ने कहा कि फिलहाल वित्तीय क्षेत्र (बैंकएवं वित्तीय संस्थान) और रियल एस्टेट क्षेत्र (उधारकर्ता) की नजर ऋण दरों के लिए अलग बेंचमार्क पर है। 
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