आरबीआई के लाभांश में कमी का नुकसान सहेगी सरकार

इंदिवजल धस्माना | नई दिल्ली Aug 14, 2017 09:59 PM IST

सरकार का अनुमान है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की अनुमानित लाभांश आमदनी में 26,000 करोड़ रुपये तक की गिरावट आएगी। मुद्रा के अंकित मूल्य और इसकी छपाई लागत में अंतर की वजह से सरकार को होने वाले मुनाफे में कमी आई। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) समूह की मुख्य अर्थशास्त्री सौम्या कांति घोष के मुताबिक नोटबंदी के बाद अतिरिक्त नकदी कम करने के आरबीआई के रिवर्स रेपो उपायों का भी असर पड़ा।
 
वर्ष 2017-18 के केंद्रीय बजट में आरबीआई, सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थान से 75,000 करोड़ रुपये की प्राप्तियों लक्ष्य रखा गया था जो वर्ष 2016-17 में 76,000 करोड़ रुपये था। आरबीआई ने कहा कि यह मौजूदा वित्तीय वर्ष में सरकार को 30,659 करोड़ रुपये का हस्तांतरण करेगी जो पिछले साल के 65,876 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी कम है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और वित्तीय संस्थानों की तरफ से 10,000 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। 
 
आरबीआई की तरफ से सरकार को बतौर लाभांश जो देने की उम्मीद थी उसमें 35,000 करोड़ रुपये का अंतर है। घोष का कहना है कि नोटबंदी की कवायद से आरबीआई को मुद्रा छपाई की लागत की वजह से घाटा हुआ क्योंकि 15.44 करोड़ रुपये के अंकित मूल्य वाले नोटों की छपाई करनी पड़ी। नोटों की छपाई की पूरी लागत 12,600-13,000 करोड़ रुपये के दायरे में है। आरबीआई के परिपत्र और घोष की टीम के आंतरिक अनुमान के मुताबिक ज्यादा रकम वाले नोटों मुद्रित की संख्या 5,200 करोड़ है। इस साल जून तक पुराने नोटों की जगह नए नोटों की आपूर्ति मूल्य के लिहाज से 84 फीसदी तक थी। इसके अलावा तंत्र ने नोटबंदी की अवधि के बाद अतिरिक्त नकदी कम करने के लिए उपाय किए। घोष का अनुमान है कि नीतिगत रेपो (फिक्स्ड और वेरिएबल) और रिवर्स रेपो दर (फिक्स्ड और वेरिएबल) का इस्तेमाल कर नकदी समायोजन सुविधा के तहत आरबीआई ने बैंकों के लिए 12,600 करोड़ रुपये का ब्याज पहले से निश्चित किया था।
 
उनका कहना है कि नोटों की छपाई से होने वाला घाटे और रिवर्स रेपो के दबाव से इस साल आरबीआई के लाभांश हस्तांतरण में करीब 26,000 करोड़ रुपये की कमी आई। उनके अनुमान के मुताबिक दूसरे स्रोतों से होने वाली आमदनी का घाटा करीब 9,000 करोड़ रुपये तक हो सकता है। इंडिया रेटिंग्स के देवेंद्र पंत कहते हैं कि डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती से आरबीआई के पास मौजूद विदेशी संपत्तियों का मूल्य कम हो गया। आरबीआई मुख्य रूप से अपनी विदेशी संपत्ति में अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड और सोना रखता है।
 
नवंबर 2016 में रुपये के 67.65 रुपये के औसत मूल्य में 4.7 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई। जुलाई में (आरबीआई के वित्त वर्ष का आखिरी महीना) यह 64.45 रुपये थी। क्या इस कमी से केंद्र का राजकोषीय घाटा बढ़ेगा जिसका लक्ष्य देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.2 फीसदी पर तय किया गया है। घोष का कहना है, 'नहीं।' उनका कहना है कि नोटबंदी के बाद 22 लाख नए प्रत्यक्ष करदाताओं की तादाद बढऩे से 20,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व बढऩे की संभावना है। 
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