'काम नहीं तो वेतन नहीं' का आदेश वापस

अभिजित लेले | मुंबई Sep 03, 2017 10:06 PM IST

सबसे पहले कोलकाता के यूको बैंंक के जोनल मैनेजर ने कर्मचारियों को चेतावनी दी थी कि अगर प्रदर्शन बेहतर नहीं रहा तो वेतन रोक दिया जाएगा। फिर सार्वजनिक क्षेत्र के एक और बैंक, सिंडिकेट बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक ने चेतावनी दी थी कि 'काम नहीं तो वेतन नहीं' मिलेगा। इस तरहके कदम के जोखिम को देखते हुए सिंडिकेट बैंक ने नोटिस वापस लेने का आदेश दिया। यह (नोटिस जारी करना) काम क्षेत्रीय स्तर पर हुआ था। यह संबंधित अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में नहीं था कि ऐसे आदेश जारी करें। बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी एम रेगो ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि इसे वापस ले लिया गया है। 

 
यह कदम ऐसे समय मेंं उठाया गया है जब यूको बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय कोलकाता ने कोलकाता क्षेत्र के अपने कर्मचारियों को वेतन न देने का फैसला किया था। इस फैसले को शीर्ष प्रबंधन ने यूनियनों के दबाव के बाद पिछले सप्ताह वापस ले लिया था। सिंडिकेट बैंक के एक क्षेत्रीय प्रबंधक ने अपने कर्मचारियों को 30 अगस्त को भेजे गए पत्र में कहा था कि सेवा के नियम और नियुक्ति की शर्तों में यह उल्लेख है कि पूरे दिन के काम पर पूरे दिन का वेतन मिलेगा। ऐसे में अगर कोई कर्मचारी काम का रिपोर्ट नहीं करता या अपने काम के घंटों के किसी हिस्से में काम नहीं करता है तो उसे सेवा की शर्तों का उल्लंघन माना जाएगा। कर्मचारी को उस दिन का वेतन नहीं मिलेगा जिस दिन वे काम का रिपोर्ट नहीं करते हैं। नोटिस मेंं कहा गया था कि काम नहींं तो वेतन नहीं का सिद्धांत स्वाभाविक रूप से लागू होगा और उस दिन का वेतन कर्मचारी को नहीं मिलेगा। 
 
आल इंडिया बैंंक इंप्लाइज एसोसिएशन के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने कहा कि यह गलत व्यवहार है। यूनियनें इस तरह के किसी कदम का विरोध करेंगी और सोमवार को इस मसले को प्रबंधन के समक्ष उठाएंगी। सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकारी ने कहा कि प्रदर्शन को लेकर हर स्तर पर दबाव है, खासकर कर्ज के विस्तार, कम दर पर जमा बढ़ाने और खराब कर्ज की वसूली को लेकर दबाव है, लेकिन यहां कोई कॉर्पोरेट नियम नहीं है कि काम नहीं तो वेतन नहीं मिलेगा। 
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