दबाव वाले कर्ज में बड़ा इजाफा अब नहीं होगा : क्रिसिल

अभिजित लेले | मुंबई Sep 14, 2017 09:48 PM IST

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने आज कहा कि भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में दबाव वाली परिसंपत्तियां मध्यम अवधि में मौजूदा 11.5 लाख करोड़ रुपये से बहुत ज्यादा नहीं बढ़ेगी, जो कुल उधारी का 14 फीसदी है। उसका कहना है कि कंपनियों की साख की गुणवत्ता में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। जिंसों की उच्च कीमतें, कम ब्याज दर, पूंजीगत ढांचे में सुधार और कार्यक्षमता के फायदे से ऐसी प्रवृत्ति सामने आई है। क्रिसिल का मानना है कि इस वित्त वर्ष गैर-निष्पादित आस्तियों के सृजन की रफ्तार घटेगी, लेकिन कुल मिलाकर इसमें इजाफा जारी रहेगा क्योंकि फंसा कर्ज अभी भी रिकवरी से ज्यादा है। बैंंकिंग में सकल एनपीए मार्च 2018 तक कुल उधारी का करीब 10.5 फीसदी रहने की संभावना है, जो मार्च 2017 में 9.5 फीसदी रहा था।
 
क्रिसिल ने कहा, दिवालिया संहिता और विभिन्न पुनर्गठन योजनाओं के जरिए दबाव वाले खाते के तीव्र समाधान बैंकों की संपत्ति की गुणवत्ता में सुधार के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। बैंकिंग व्यवस्था में करीब दो तिहाई दबाव वाली परिसंपत्तियां पहले ही मार्च 2017 तक एनपीए के तौर पर पहचानी जा चुकी हैं। दबाव वाली परिसंपत्तियों में घोषित सकल एनपीए और मानक परिसंपत्तियां शामिल हैं, जिस पर अभी दबाव है और यह मध्यम अवधि में एनपीए में तब्दील हो सकती हैं। दबाव वाली परिसंपत्तियों में ज्यादातर अभी फंसे कर्ज के तौर पर नहीं पहचानी गई संपत्तियां, पुनर्गठित मानक खाते और एसडीआर, 5:25 और एस4ए आदि योजनाओं के तहत दर्ज राशि शामिल है। बुनियादी ढांचा, बिजली, इंजीनियरिंग और निर्माण क्षेत्र बैंकिंग में दबाव वाली परिसंपत्तियों में खासा योगदान करते हैं।
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