दरों पर विराम, घटाया अनुमान : आरबीआई ने नीतिगत दरों में नहीं किया बदलाव

अनूप रॉय | मुंबई Oct 04, 2017 10:40 PM IST

एसएलआर 50 आधार अंक घटाया

भारतीय रिजर्व बैंक ने आज नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया लेकिन इस साल की दूसरी छमाही के लिए महंगाई बढ़ने और विकास दर घटने का अनुमान जताया है। उसने सरकार को आगाह किया है कि वह वित्तीय प्रोत्साहन से बचे। मौद्रिक नीति समिति के 6 में से 5 सदस्य दरें नहीं घटाने के पक्ष में थे जबकि एकमात्र सदस्य रवींद्र ढोलकिया 25 आधार अंक की कमी चाहते थे। इस फैसले के बाद रीपो दरें जहां 6 फीसदी बनी रहेंगी वहीं केंद्रीय बैंक ने बैंकों के लिए बॉन्ड रखने की अनिवार्यता घटाते हुए सांविधिक  तरलता अनुपात (एसएलआर) में 50 आधार अंक की कमी करते हुए इसे जमा राशि का 19.5 फीसदी कर दिया है।

केंद्रीय बैंक ने दूसरे कई नीतिगत उपायों की पहल की है। इनमें ऋण के लिए बेंचमार्क का बाहरी पैमाना अपनाने और सीमांत लागत आधारित मौजूदा ऋण व्यवस्था को खत्म करना शामिल है। हालांकि दरों का फायदा ग्राहकों को पहुंचाने को लेकर बैंकों ने कोई वादा नहीं किया। यह उम्मीद शुरू से थी कि दरों में बदलाव नहीं होगा लेकिन सीमा से अधिक राजकोषीय खर्च बढ़ाने पर सरकार को आगाह करना नई बात है।

समिति ने कहा कि जीएसटी लागू होने से देश की आर्थिक संभावनाओं पर असर पड़ा है और पूरी कर प्रक्रिया का और सरलीकरण किया जाना चाहिए। आरबीआई गवर्नर ऊर्जित पटेल ने पत्रकारों से कहा कि केंद्र और राज्यों दोनों के पास इतनी गुंजाइश नहीं है कि वे वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज दे सकें। केंद्र और राज्यों का संयुक्त राजकोषीय घाटा पहले ही 6 फीसदी पहुंच चुका है। इसलिए बहुत सतर्क रहने की जरूरत है।

केंद्रीय बैंक ने अपने नीतिगत बयान में कहा कि दूसरी छमाही में महंगाई 4.2 से 4.6 फीसदी रह सकती है। इस बयान के बाद 10 साल वाले बॉन्ड पर प्राप्तियां 6 आधार अंक बढ़कर 6.7 फीसदी हो गई। पटेल ने कहा कि यह देखना होगा कि अगले 6-7 महीनों में मुद्रास्फीति का क्या रुख रहता है। केंद्रीय बैंक के अनुसार खाद्यान्न की कीमतें चिंतित कर सकती हैं क्योंकि खरीफ की बुआई पिछले साल से कम रही है। दलहन की कीमतें स्थिर होना शुरू हो गई हैं। कच्चे तेल की कीमतों से भी खुदरा महंगाई बढ़ सकती है। इतना ही नहीं कृषि ऋण माफी से सार्वजनिक खर्च की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है जिससे महंगाई बढऩे की संभावना रहेगी। नीति दस्तावेज के अनुसार अगर वेतन और भत्तों में राज्यों की संभावित बढ़ोतरी को शामिल किया जाए तो मुद्रास्फीति 100 आधार अंक और बढ़ सकती है। 

एचडीएफसी बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री अभीक बरुआ ने कहा कि मुद्रास्फीति का अनुमान बढ़ाना जल्दबाजी है। उन्होंने कहा कि अगर विकास दर कमजोर रहती है तो दरों में एक और कटौती करना संभव है। केंद्रीय बैंक ने इस साल के लिए सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) में वृद्धि का अनुमान पहले के 7.3 फीसदी से घटाकर 6.7 फीसदी कर दिया है। नीति बयान के अनुसार जीएसटी पर अभी तक हुए अमल का विपरीत असर नजर आता है। इससे अल्पावधि में विनिर्माण क्षेत्र में अनिश्चितता बढ़ी है और इसका निवेश गतिविधियों पर प्रभाव पड़ सकता है। 
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