एनपीए व मुनाफे में सुधार को प्राथमिकता

एजेंसियां | मुंबई Oct 05, 2017 09:44 PM IST

भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन का पद संभालने जा रहे रजनीश कुमार ने आज कहा कि फंसे कर्ज (एनपीए) की समस्या से निपटना और मुनाफे  में सुधार उनकी शीर्ष प्राथमिकताएं हैं। सरकार ने 59 साल के रजनीश को देश के सबसे बड़े बैंक का अगला चेयरमैन नियुक्त किया है। वह 7 अक्टूबर को अरुंधती भट्टïाचार्य की जगह लेंगे और एसबीआई के 25वें चेयरमैन होंगे। फिलहाल वह खुदरा बैंकिंग के प्रबंध निदेशक पद पर हैं।
 
रजनीश ने कहा, 'फंसे कर्ज का समाधान बैंक की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस बारे में तुरंत उपाय किए जाने की जरूरत है जिससे अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने में मदद मिलेगी।' उन्होंने उम्मीद जताई कि फंसे कर्ज के मामले में आने वाले दिनों में बैंक की स्थिति बेहतर होगी। उन्होंने कहा कि बैंक कॉरपोरेट क्रेडिट से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए काम कर रहा है और जल्दी ही इस मोर्चे पर कुछ बदलाव देखने को मिलेगा।
 
अप्रैल से जून के दौरान एसबीआई का सकल एनपीए 7.40 फीसदी से बढ़कर 9.97 फीसदी और शुद्घ एनपीए 4.36 फीसदी से बढ़कर 5.97 फीसदी पहुंच गई। इस दौरान खुदरा एनपीए 1.56 फीसदी बढ़कर 7,632 करोड़ रुपये पहुंच गया जबकि कृषि क्षेत्र में फंसा कर्ज 9.51 फीसदी की बढ़त के साथ 17,988 करोड़ रुपये हो गया। इससे पहले इस साल 5 सहायक बैंकों का एसबीआई में विलय किया गया था जिससे कुल 550 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ यह दुनिया के शीर्ष 50 बैंकों की सूची में आ गया था। रजनीश ने कहा कि वह बैंक को इस स्थान पर बरकरार रखना चाहते हैं लेकिन उनका जोर बैंक के बैलेंस शीट का आकार बढ़ाने के बजाय उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत करने पर होगा। उन्होंने कहा, 'पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्रावधान की जरूरतों के कारण हमारा प्रदर्शन प्रभावित हुआ। मेरा प्रयास आकार बढ़ाने के बजाय मुनाफा बढ़ाने पर होगा।' 
 
उन्होंने संकेत दिया कि प्रबंधन टीम को पुनर्गठित करके मध्य स्तर पर कुछ बदलाव हो सकता है। रजनीश ने कहा, 'अभी हमारा बहुत समय फंसे कर्ज की समस्या से निपटने और उसके समाधान पर खर्च होता है। हम इस बात पर विचार कर रहे हैं कि इसे कैसे अलग किया जाए ताकि फंसे कंजे को एक प्रबंधन टीम देखे और दूसरी टीम कर्ज संबंधी गतिविधियों पर ध्यान दे। हम जल्दी ही इसे अंतिम रूप देंगे।' उन्होंने कहा कि ढांचागत और खुदरा क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और बैंक बुनियादी क्षेत्र की अच्छी परियोजनाओं के लिए पैसा देने के लिए तैयार है। 
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