स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने देसी तकनीकी टीम में किया विस्तार

आयान प्रामाणिक | बेंगलूरु Oct 10, 2017 09:56 PM IST

स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक ने अपने भारतीय केंद्रों में वैश्विक परिचालन की मदद के लिए उत्पाद एवं ऐप्लिकेशन तैयार करने की योजना बनाई है ताकि प्रौद्योगिकी वेंडरों को आउटसोर्सिंग कम की जा सके। ब्रिटेन के इस बैंक ने आज स्टैंडर्ड चार्टर्ड ग्लोबल बिजनेस सर्विसेज (एससीजीबीएस) का बेंगलूरु परिचालन शुरू किया। कंपनी इस टीम को बढ़ाकर 6,000 लोगों का करना चाहती है जो फिलहाल 3,300 लोगों की है। एससीजीबीएस के तहत वैश्विक स्तर पर कार्यरत कुल 19,300 लोगों में से दो तिहाई लोग भारत में कार्यरत हैं जिसका मुख्य केंद्र चेन्नई में है।
 
फिलहाल करीब आधी तकनीकी सेवाएं टाटा कंसल्टैंसी सर्विसेज सहित अन्य वैश्विक वेंडरों को आउटसोर्स की जाती हैं। बैंक दो प्रमुख मॉडलों- खुद की परियोजनाओं पर आईटी कंपनियों के कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर कार्यबल में विस्तार और सेवा संबंधी अनुबंधों के जरिये सॉफ्टवेयर रखरखाव अनुबंध- के जरिये सॉफ्टवेयर सेवाओं की खरीद करता है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड 68 से अधिक देशों में ऐप्लिकेशन तैयार करने और तकनीकी बदलाव में मदद के लिए खुद के कारोबार में विस्तार कर रहा है। इससे साफ जाहिर होता है कि बैंक की नजर आंतरिक विस्तार पर है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड के मुख्य सूचना अधिकारी (समूह) माइकल गॉरिज ने कहा, 'कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि क्षमता में खाइयों को पाटने का तात्कालिक उपाय है। इसलिए जब हम लंबी अवधि के लिए तैयारी करेंगे और वहां सॉफ्टवेयर के खास क्षेत्रों में स्थायी एवं निरंतर विकास को देखेंगे तो हम लोगों को नियुक्त करेंगे। इसलिए बैंक के साथ कर्मचारियों को बरकरार रखना हमारे लिए वास्तव में काफी महत्त्वपूर्ण है।'
 
यह वैश्विक कंपनियों के बीच बढ़ती उन प्रवृत्तियों के अनुरूप है जिनके तहत वे भारत जैसे देशों में अपने केंद्रों का विस्तार कर तकनीकी संबंधी बदलाव को आगे बढ़ा रही हैं। इन देशों में उपभोक्ता अपने स्मार्टफोन पर फेसबुक की ही तरह बैंकिंग ऐप्लिकेशन की भी उम्मीद करते हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए वैश्विक कंपनियां आउसोर्सिंग के बजाय निजी अथवा इन-हाउस क्षमता विस्तार के लिए प्रयोग कर रही हैं।
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