एमपीसी की बैठक के दस्तावेज में बढ़ती महंगाई पर स्पष्ट असहजता

अनूप रॉय | मुंबई Oct 18, 2017 09:40 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति की बैठक के दस्तावेज से स्पष्ट तौर पर बढ़ती महंगाई पर सदस्यों के बीच असहजता नजर आती है, जिसके चलते वे दरें स्थिर रखने के लिए प्रोत्साहित हुए, जबकि एक सदस्य दरों में कटौती के पक्ष में थे। 4 अक्टूबर को घोषित मौद्रिक नीति में रीपो दरों को 6 फीसदी पर अपरिवर्तित रखा गया। अगस्त में महंगाई 3.36 फीसदी पर पहुंच गई, जो जून में 1.46 फीसदी रही थी। आरबीआई के गवर्नर ऊर्जित पटेल ने कहा, हाल में महंगाई तेजी से बढ़ी है। गवर्नर ने कहा, राज्य सरकारों की तरफ से कृषि कर्ज माफी और वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने से महंगाई के लिए जोखिम हुआ।
 
उन्होंने कहा, महंगाई के अनुमान में घटने की प्रवृत्ति नहीं है। वस्तु एवं सेवा कर के क्रियान्वयन ने अल्पावधि के लिए विनिर्माण क्षेत्र में अनिश्चितता पैदा की, जो निवेश की गतिविधियों में फिर देरी कर सकता है। पटेल ने जीएसटी से संबंधित समस्याओं के तेजी से समाधान की वकालत की। उन्होंने कहा, विभिन्न तरह के अवरोध हटाकर निवेश को प्रोत्साहित करने की कोशिश होनी चाहिए।
 
पटेल ने कहा, निवेश चक्र की बहाली के लिए बैंकों की दबाव वाली बैलेंस शीट का समाधान महत्वपूर्ण बना हुआ है। अंतत: सरकार को हर तिमाही बचत योजनाओं पर प्रशासित ब्याज दर को फॉर्मूले के आधार पर समायोजित करना चाहिए ताकि मौद्रिक संप्रेषण में मदद मिले। महंगाई को 4 फीसदी पर रखने के लिए इससे जुड़े अल्पावधि व मध्यम अवधि के जोखिम की पहचान महत्वपूर्ण है। बाह्य व वित्तीय मोर्चे पर अनिश्चिताओं पर हम सचेत हैं, जो हमें सतर्कता भरा रवैया अपनाने को कह रहा है। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य मौद्रिक संप्रेषण और कंपनियों व बैंकों की बैलेंस शीट के दबाव में सुधार के मामले में प्रतिबद्ध बने रहना चाहते थे। बाहरी बेंचमार्क के आधार पर उधारी दर तय करने (आरबीआई के स्टडी ग्रुप ने इसका प्रस्ताव किया है) से संप्रेषण में सुधार होगा।
कीवर्ड MPC, RBI,

  
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