'वित्त वर्ष 2018-19 में होगा आईओबी का कायापलट'

टी ई नरसिम्हन |  Oct 22, 2017 09:40 PM IST

पिछले दो साल इंडियन ओवरसीज बैंक के लिए मुश्किल भरे रहे हैं। एनपीए बढ़ रहा है, आक्रामक विस्तार ने लागत बढ़ाई है और नए सीबीएस की ओर अचानक बढऩे से शाखाओं पर दबाव बढ़ा है। आरबीआई ने बैंक को त्वरित उपचारात्मक कदम (पीसीए) के दायरे में ला दिया है। बैंक के प्रबंध निदेशक व सीईओ आर सुब्रमण्या कुमार के साथ टी ई नरसिम्हन की बातचीत के मुख्य अंश...

 
कायापलट की योजना कैसे तैयार हुई?
 
एक साल पहले के संकट वाले चरण से बैंक एकीकरण के चरण की ओर बढ़ा है, जो दिसंबर 2017 तक हासिल होने की उम्मीद है। जनवरी 2018 से हम कारोबार में इजाफा, रिकवरी और एनपीए में कमी लाने में सक्षम होंगे। सभी कदम एक साल पहले उठाए गए हैं और अब इसके परिणाम आने शुरू हो गए हैं। कायापलट को सहारा देने के लिए शाखा व इकाई के स्तर पर बढ़त की हमारी योजना है और यह सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। 18 महीने पहले करीब 21 फीसदी शाखाएं नुकसान में थीं, आज यह सिर्फ 12-13 फीसदी या 472 शाखाएं ऐसी हैं। मार्च 2018 तक यह 300 से कम होगी। पहले 50 फीसदी से ज्यादा शाखाएं उधारी के विस्तार में भाग नहीं ले रही थी, आज यह सिर्फ 10-15 फीसदी है। मुझे भरोसा है कि 2018-19 में कायापलट होगा और तिमाही दर तिमाही टिकाऊ लाभ होगा।
 
अभी भी एनपीए करीब 35,000 करोड़ रुपये के उच्चस्तर पर है...
 
करीब 7,000 करोड़ रुपये का एनपीए एनसीएलटी को संदर्भित किया गया है, 3,000 करोड़ रुपये के समाधान के निर्देश दिए जा चुके हैं, जिसके लिए हम अन्य बैंकों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। ऐसे में करीब 10,000 करोड़ रुपये का समाधान अगले साल तक हो जाएगा। बाकी 25,000 करोड़ रुपये में ज्यादातर 50 लाख रुपये से कम वाले हैं, जिससे करीब 1,400-1,500 खाते जुड़े हैं, जिसकी रिकवरी के लिए हम कदम उठा रहे हैं और इसके नतीजे भी दिखने लगे हैं। उधार लेने वाले एकबारगी निपटान के लिए आगे आ रहे हैं।
 
एनपीए में इजाफे पर क्या कहेंगे?
 
इस पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। हमने आसान व लगातार निगरानी के लिए एनालिटिकल आधारित सिस्टम तैयार किया है। मार्च 2016 में करीब 22,000 करोड़ रुपये फंसा कर्ज था और 5,800 करोड़ रुपये की वसूली हुई। मार्च 2017 में 12,000 करोड़ रुपये फंसा कर्ज था और करीब 8,700 करोड़ रुपये की वसूली हुई। बकाए वाली इकाई का दौरा कर हम आक्रामकता के साथ फंसे कर्ज में कमी ला रहे हैं। यह रुख बदलने की हमारी मंशा है, जिसका मतलब यह हुआ कि आने वाली तिमाही में फंसे कर्ज के मुकाबले वसूली ज्यादा होगी। मार्च-जून 2017 में एनपीए में शुद्ध रूप से 355 करोड़ रुपये जुड़े, जो 2016-17 में चार अंकों में हुआ करता था।
 
क्या अपनी पीसीएल के सभी मानदंड हासिल कर लिए?
 
पीसीए के तहत हमें निर्देश दिया गया कि चालू-बचत खाता (कासा) समकक्ष बैंकों के तुलनायोग्य होना चाहिए। सितंबर 2015 में पीसीए की शुरुआत में आईओबी का कासा 23-28 फीसदी के निचले स्तर पर था, जो अब 36 फीसदी है और समकक्ष बैंकों से तुलनायोग्य है और अब हम इसमें पिछड़े हुए नहीं हैं। दूसरा निर्देश उच्च लागत वाली जमाओं में कमी लाने और जमाओं की संरचना को फिर से संतुलित करने की थी। उच्च लागत वाली जमाएं 52,000 करोड़ रुपये से घटकर 168 करोड़ रुपये रह गई है। फिर से संतुलन उच्च अनुपालन के साथ हासिल हुआ। करीब 58 फीसदी उधारी कॉरपोरेट व मिड कॉरपोरेट का था, जो अब घटकर 48 फीसदी रह गया है। खुदरा, एमएसएमई, कृषि व अन्य में इजाफा हुआ, लिहाजा उच्च जोखिम भारांक वाली संपत्तियों का पुनर्संतुलन कम जोखिम भारांक वाली परिसंपत्तियों से हुआ। ज्यादा जोखिम वाले कुछ खातों से हम बाहर निकल आए। पीसीए के निर्देश के मुताबिक खर्च पहली छमाही में 2.06 फीसदी घटा और शुल्क आय में बढ़ोतरी हुई।
 
रकम जुटाने की योजना है?
 
सालाना आम बैठक में और निदेशक मंडल से 3,500 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाने की मंजूरी मिली है, जिसमें सरकारी पूंजी, क्यूआईपी, एटी-1 व एटी-2 बॉन्ड शामिल है। हम सरकारी फैसले का इंतजार कर रहे हैं, इसके बाद हम चौथी तिमाही में रकम जुटाने पर विचार करेंगे।
कीवर्ड IOB, bank, NPA,

  
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