पूंजी से सुधरेगी बैंकों की आर्थिक सेहत

अनूप रॉय और अरूप रॉयचौधरी | मुंबई/नई दिल्ली Oct 25, 2017 10:16 PM IST

बॉन्ड और बजट प्रावधान से जुटाई जाएगी पूंजी
बैंकों के पास ऋण देने के लिए उपलब्ध होगी ज्यादा पूंजी

 

रिजर्व बैंक के गवर्नर ऊर्जित पटेल ने बैंकों को फिर से पूंजी देने की सरकार की योजना की सराहना करते हुए कहा है कि यह देश के आर्थिक भविष्य की सुरक्षा के लिहाज से बड़ा अहम कदम है। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि सरकार के इस कदम से अगले एक साल के दौरान क्रेडिट वृद्धि 10 फीसदी तक बढ़ सकती है। वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को कहा था कि अगले दो साल के दौरान सरकारी बैंकों में 2.11 लाख करोड़ रुपये का पूंजी निवेश किया जाएगा। इसमें से 1.35 लाख करोड़ रुपये का निवेश पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड के रूप में होगा जबकि 76,000 करोड़ रुपये बाजार से और बजटीय प्रावधानों के जरिये जुटाए जाएंगे।

पटेल ने केंद्रीय बैंक की वेबसाइट पर जारी एक बयान में कहा कि इस योजना से बैंकों को तत्काल पूंजी मिलेगी जबकि एक समय अवधि में इसके राजकोषीय असर सीमिति होंगे। ऐसे में बॉन्ड के जरिये पुनर्पूंजीकरण से सरकार के लिए तरलता पर असर नहीं पड़ेगा। बस उसे ब्याज देना होगा जो उसके सालाना राजकोष के आंकड़े में इजाफा करेगा।

सरकार के मुख्य अािर्थक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने भी कहा कि बैंकों को बॉन्ड के जरिये 1.35 लाख करोड़ रुपये जारी करने का वास्तविक राजकोषीय असर करीब 8,000-9,000 करोड़ रुपये के ब्याज भुगतान के रूप में होगा। इससे महंगाई बढऩे की संभावना नहीं है।

पटेल ने कहा कि पिछले दशक में पहली बार हमारे पास यह मौका है कि हम बैंकिंग क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान करने के लिए टुकड़ों में उपाय करने के बजाय एक व्यापक और स्पष्टï नीति बनाएं। उन्होंने कहा कि पूंजीकरण से बेहतर स्थिति वाले बैंकों के पास ऋण देने के लिए तुरंत पूंजी उपलब्ध होगी जबकि दूसरे बैंकों को अपनी स्थिति सुधारने का मौका मिलेगा।

विश्लेषकों का कहना है कि बैंकों में पूंजी डालने से आर्थिक विकास की गति तेज होने की संभावना है। गोल्डमैन सैक्स ने एक रिपोर्ट में कहा कि अगर बैंकिंग प्रणाली का लाभ अनुपात बरकरार रहता है तो पूंजी निवेश से क्रेडिट वृद्धि 10 फीसदी तक बढ़ सकती है और जीडीपी की रफ्तार में 5 फीसदी तक का इजाफा हो सकता है। इसी तरह मॉर्गन स्टैनली ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा कि फंसे कर्ज की समस्या से निपटने के लिए आक्रामक पुनर्पूंजीकरण की जरूरत थी। रिपोर्ट के मुताबिक अब बैंक जरूरी घाटा सह सकते हैं, उचित प्रावधान कर सकते हैं और आगे बढ़ सकते हैं।

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