दूसरी तिमाही में बढ़ा निजी बैंकों का एनपीए प्रावधान

अभिजित लेले और अनूप रॉय | मुंबई Oct 30, 2017 09:59 PM IST

निजी क्षेत्र के बैंकों की स्थिर संपत्ति गुणवत्ता की उम्मीद सितंबर 2017 में समाप्त दूसरी तिमाही में ध्वस्त हो गई क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक ने कुछ बैंकों को कुछ निश्चित खाते फंसे कर्ज के तौर पर मानने और इसके मुताबिक प्रावधान करने को कहा है। फंसे कर्ज पर अलग-अलग राय से निवेशकों का सेंटिमेंट प्रभावित हुआ है। निजी क्षेत्र के 13 बैकों ने अब तक नतीजे घोषित किए हैं और उनका सकल एनपीए दूसरी तिमाही में बढ़कर 96,987 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो जून 2017 में समाप्त तिमाही में 87,664 करोड़ रुपये रहा था। सकल एनपीए में सितंबर 2016 की तिमाही के मुकाबले भारी बढ़ोतरी दर्ज हुई है क्योंकि तब सकल एनपीए 68,197 करोड़ रुपये था।
 
फंसे कर्ज में इजाफे के साथ प्रावधान भी 35.7 फीसदी बढ़ा और यह पहली तिमाही के 8,196 करोड़ रुपये के मुकाबले बढ़कर 11,125 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। हालांकि साल दर साल के हिसाब से प्रावधान 11.8 फीसदी घटा और यह 12,616 करोड़ रुपये के मुकाबले 11,125 करोड़ रुपये रह गया। निजी बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि तीन वजहों से प्रावधान में इजाफा हुआ। पहला, दूसरी तिमाही में फंसे कर्ज में नया जुड़ाव, दूसरा, बैंकों ने पुराने फंसे कर्ज के लिए प्रावधान में और बढ़ोतरी की और तीसरा, बैंकों ने उन परिसंपत्तियों के लिए रकम अलग रखी, जिसके बारे में आरबीआई ने कहा था कि वित्त वर्ष 2017 के अंकेक्षण के बाद बैंक उसे एनपीए माने। 
 
बैंकिंग नियामक ने कुछ निजी बैंकों को वित्त वर्ष 2017 के लिए कुछ निश्चित कर्ज को एनपीए के तौर पर वर्गीकृत करने को कहा था और उसके मुताबिक प्रावधान करने के लिए भी। निजी क्षेत्र के तीन बैंकों येस बैंक, ऐक्सिस बैंक और लक्ष्मी विलास बैंक को सितंबर तिमाही में इस निर्देश के तहत भारी झटका लगा।
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