पेशकश पर नहीं मिला कोई जवाब

अनूप रॉय और नीरज भट्ट |  Oct 31, 2017 10:05 PM IST

बीएस बातचीत

आईडीएफसी बैंक के संस्थापक एमडी एवं सीईओ राजीव लाल ने अनूप रॉय और नीरज भट्ट से बातचीत में कहा कि आईडीएफसी की पेशकश पर श्रीराम कैपिटल के शेयरधारक चुप रहे। मुख्य अंश:

यह सौदा क्यों टूट गया?
भरसक प्रयास के बावजूद हम किसी अपेक्षित मूल्यांकन तक नहीं पहुंच सके। इसलिए हमने बातचीत छोड़ दी और विशेष समझौते को खत्म कर दिया जिस पर तत्काल प्रभाव के लिए हमने हस्ताक्षर किए थे। अब हम किसी से भी बात करने के लिए आजाद हैं। रणनीतिक विलय लिए संभावनाएं तलाशने के लिए हमने एक विशेष अवधि निर्धारित की थी। किसी खास लेनदेन ढांचे अथवा मूल्यांकन पर कोई समझौता नहीं हुआ था।

आपने क्या पेशकश की थी?
मैं सार्वजनिक तौर पर इसका खुलासा नहीं करना चाहता।

विलय पर बातचीत का क्या आधार था?
प्रस्तावित बातचीत का केंद्र आईडीएफसी बैंक और श्रीराम सिटी यूनियन फाइनैंस (एससीयूएफ) के बीच प्रस्तावित विलय पर बातचीत था जिससे बैंक के खुदरा कारोबार को गति मिल सकती थी। जुलाई में हमने जब पे्रस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया था तब तक कोई मूल्यांकन तय नहीं किया गया था। हालांकि लोगों को लगता है कि मूल्यांकन का कोई ढांचा तैयार कर लिया गया था और इसलिए वे मूल्यांकन का आकलन कर कर रहे थे, लेकिन यह
सही नहीं है।

यह सौदा काफी जटिल था और अधिकतर लोग इसे पूरा होने के प्रति आशंकित थे। इस पर आप क्या कहेंगे?
इसकी जटिलता के मद्देनजर हमने विशेष बातचीत की अवधि को एक महीना बढ़ा दिया था जो 8 नवंबर को खत्म होती। हमें विश्वास था कि हम अपने बहुलांश शेयरधारकों को एक उचित मूल्यांकन पर साथ ला सकते हैं। वही पेशकश हमने श्रीराम कैपिटल के शेयरधारकों से की लेकिन औपचारिक तौर पर हमें कोई जवाब नहीं मिला। शायद उनके शेयरधारक हमारी पेशकश को लेकर सहज मजसूस नहीं कर रहे होंगे। हमें उम्मीद थी कि उनके शेयरधारों का रुख नरम होगा और हमें लग रहा था कि वे अधिक मूल्यांकन की बात कहेंगे।

तो आईडीएफसी का कहना है कि विलय पर बातचीत टूटने के लिए श्रीराम कैपिटल जिम्मेदार है?
नहीं, मैंने ऐसा नहीं कहा। वे अधिक मूल्यांकन के लिए कह सकते थे। उन्होंने यह नहीं कहा कि हमारा मूल्यांकन अधिक हो सकता था। हम उम्मीद कर रहे थे कि कम से कम वे एक औपचारिक पेशकश के साथ सामने आएंगे जिस पर हमारा बोर्ड विचार कर सकता था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

अब आपकी क्या योजना है?
हम अपने कारोबार के विस्तार के लिए एक व्यवस्थित राह पर काम कर रहे हैं। हम अपने बहीखाते पर खुदरा कारोबार की मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा हम अपने गैर-बुनियादी ढांचा कॉरपोरेट ऋण और शुल्क आधारित आय बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

क्या बातचीत फिर शुरू होने की कोई गुंजाइश है?
बातचीत संभव है लेकिन मानव प्रकृति ऐसी है कि यह आसान नहीं होगी।

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