एशियन बैंक करेगा मोटा निवेश

ज्योति मुकुल | नई दिल्ली Nov 03, 2017 09:47 PM IST

भारत की परियोजनाओं में इस साल एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) करीब 100 करोड़ डॉलर का निवेश कर सक ता है। चीन स्थित बहुपक्षीय विकास बैंक अगले साल विभिन्न परियोजनाओं में कुल 500 करोड़ डॉलर निवेश पर विचार कर रहा है।  एआईआईबी के मुख्य निवेश अधिकारी व उपाध्यक्ष डीजे पांडियन ने कहा कि परियोजनाओं के लिए सीधे उधारी देने के अलावा यह भारत सरकार द्वारा गठित नैशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड (एनआईआईएफ) के माध्यम से 20 करोड़ डॉलर निवेश कर सकता है। पिछले महीने अबूधाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी ने एनआईआईएफ से 1 अरब डॉलर निवेश के लिए समझौता किया था, जो सरकार की स्मार्ट सिटी, हरित ऊर्जा और सफाई परियोजनाओं को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगा। 
 
मेट्रो रेल की 4 लाइनों में 50 करोड़ डॉलर और मुंबई की उपनगरीय रेल व्यवस्था में 60 करोड़ डॉलर निवेश के अलावा 34 करोड़ डॉलर बेंगलूरु मेट्रो परियोजना में निवेश की योजना है। चीन समर्थित बैंंक में भारत दूसरा सबसे बड़ा हिस्सेदार है।  बैंक मुख्य रूप से स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित करेगा। एआईआईबी के उपाध्यक्ष, नीति एवं रणनीति जोआचिम वॉन एम्सर्ग ने कहा, 'शहरों वर शहरी रेल परियोजनाओं में हमारे पास और भी तमाम परियोजनाएं हैं। भारत में हम मांग और जरूरत देख रहे हैं। हम इस क्षेत्र में अपना ब्रांड और खुद की क्षमता बना सकते हैं।' 
 
एआईआईबी बोर्ड ने तीन परियोजनाओं में 58.8 करोड़ डॉलर निवेश को मंजूरी दी है और 15 करोड़ डॉलर इंडिया इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड में निवेश किया जाएगा, जिसका प्रायोजन सिटी ग्रुप, आईडीएफसी लिमिटेड और आईआईएफसीएल करेंगे।  एम्सबर्ग ने कहा, 'ऊर्जा क्षेत्र में भारत की महत्त्वाकांक्षी योजना है लेकिन हमने खरीदारों व वितरण कंपनियों की चुनौतियों, उनकी ताकत और विविधता  के बारे में सुना है। हम इस बात से वाकिफ हैं कि भारत में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आक्रामक बोली लगाई जा रही है और इस क्षेत्र में उन कंपनियों के निवेश की स्थिरता से वाकिफ हैं।' 
 
उन्होंने कहा कि अन्य बाजारों में देखा गया है कि कभी कभी बोली लगाने वाले बहुत आक्रामक होते हैं और बोली वित्तीय रूप से व्यावहारिक नहीं होती है। उन्होंने कहा कि यह बहुत बेहतर और उत्साहजनक है कि अक्षय ऊर्जा के दाम में गिरावट आ रही है, लेकिन इन बोलियों के मामले में नजर  रखनी होगी कि ये वित्तीय रूप से व्यावहारिक हैं और कंपनियां इन्हें 20 साल या उससे ज्यादा समय चलाने में सक्षम हैं। 
 
एक जोखिम निजी कंपनियों व सरकार के बीच होने वाली संविदा के मसले को लेकर भी आता है। एम्सबर्ग ने कहा, 'हमने सुना है कि पहले के सौदोंं में शुल्क को लेकर फिर से बातचीत हो रही है। अगर सरकार निजी क्षेत्र से निवेश आकर्षित करना चाहती है तो विश्वसनीयता बरकरार रखनी होगी।' एआईआईबी आंध्र प्रदेश, झारखंड, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सरकार की सबके लिए बिजली कार्यक्रम के तहत बिजली वितरण कारोबार में निवेश करने पर भी विचार कर रही है। इसके अलावा मध्य प्रदेश की ग्रामीण सड़क योजनाओं पर 14 करोड़ डॉलर निवेश किया जाएगा। 
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