बैंक सम्मेलन में एनपीए पर ध्यान

अभिजित लेले | मुंबई Nov 10, 2017 10:00 PM IST

बैंकों में 2.11 लाख करोड़ रुपये पूंजी डालने की योजना के बीच सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी गुरुग्राम में इस सप्ताहांत सरकारी अधिकारियों व विशेषज्ञों के साथ प्रशासन संबंधी मसलोंं, दिवालिया मामलों, वसूली और कर्ज की मांग बहाल होने जैसे अहम मसलों पर चर्चा करेंगे।  इस सम्मेलन को विचार मंथन नाम दिया गया है। इसमें 7 समूह अपनी प्रस्तुतियां देंगे, जिनकी अध्यक्षता सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों के प्रबंध निदेशक या मुख्य कार्यकारी अधिकारी करेंगे। सरकारी बैंकों के अधिकारियों, सरकारी अधिकारियों व विशेषज्ञों की यह इस तरह की तीसरी बैठक है। इसके पहले 2014 और 2016 में ऐसी बैठकें हो चुकी हैं।
 
सार्वजनिक क्षेत्र के एक बैंक के अधिकारी ने कहा कि पूंजी प्रतिबद्धता महज एक हिस्सा है, अब प्रशासन एवं कुशलता में सुधार करने की बारी है। इसमें शामिल होने वाले प्रतिनिधि प्रशासन, मानव संसाधन से जुड़े मसलों व बदलाव पर जोर होगा। इसका मकसद कर्ज देने की क्षमता में बढ़ोतरी, नौकरियों में वृद्धि और सरकार सहित विभिन्न हिस्सेदारों को बेहतर मुनाफा देना है। 
 
उम्मीद की जा रही है कि भारतीय स्टेट बैंक एकेडेमी में होने वाले दो दिवसीय सम्मेलन को वित्त मंत्री अरुण जेटली संबोधित करेंगे। शनिवार के शुरुआती सत्र में 9 साल के दौरान कर्ज में बढ़ोतरी, मंदी के असर आदि पर चर्चा होगी। विभिन्न समूह जिम्मेदार बैंकिंग और वित्तीय समावेशन के लिए डिजिटलीकरण पर जोर जैसे विषयों पर प्रस्तुति देंगे। बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार ने मझोले, छोटे एवं सूक्ष्य उद्योगों को कर्ज बढ़ाने को प्राथमिकता दी है, क्योंकि इस क्षेत्र में रोजगार सृजन की क्षमता ज्यादा है। प्रस्तुति व अनुभव साथा करने के लिए एक विषय यह भी होगा। 
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