संपत्ति पुनर्गठन कंपनियों के मूल्यांकन में आएगी मजबूती

अनूप रॉय | मुंबई Nov 24, 2017 10:11 PM IST

संपत्ति पुनर्गठन कंपनियों (एआरसी) को दबाव वाली परिसंपत्तियों में 26 फीसदी से ज्यादा की शेयरधारिता की आरबीआई की अनुमति इस क्षेत्र के लिए स्वागतयोग्य कदम है और इसके चलते विदेशी निवेशकों के लिए संभावित तौर पर एआरसी का मूल्यांकन मजबूत होगा। गुरुवार को आरबीआई ने अपनी वेबसाइट पर एक अधिसूचना में एआरसी की तरफ से कर्ज को इक्विटी में तब्दील करने की ऊपरी सीमा का जिक्र नहीं किया है। लेकिन निश्चित है कि एआरसी की स्थिति अब यह फैसला लेने में अहम होगी कि संपत्तियों का समाधान कैसे हो सकता है, जो उनकी सीमित शेयरधारिता के चलते अब तक नहीं हो पाया था। तकनीकी तौर पर हालिया नियम एआरसी को दबाव वाली परिसंपत्तियों को मालिक बनने और समाधान प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की आजादी देता है। 
 
ऐसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी ऑफ इंडिया (एआरसीआईएल) के प्रबंध निदेशक व सीईओ विनायक बहुगुणा ने कहा, अब हमारे पास नियंत्रण का बेहतर स्तर होगा और इसमें भी कि कैसे कंपनी का परिचालन होना चाहिए। इसके अतिरिक्त यह एआरसी को अपनी शेयरधारिता बढ़ाकर और कंपनी के कायापलट के बाद अपने रिटर्न को अधिकतम करने की क्षमता देता है। शेयरों को लाभ पर बेचने के अलावा आरबीआई के हालिया निर्देश से देसी एआरसी विदेशी फंडों के लिए आकर्षक बन जाएंगी, जो देश की 10 लाख करोड़ रुपये की दबाव वाली परिसंपत्ति बाजार में हिस्सेदारी लेना चाहते हैं।
 
दिवालिया संहिता के साथ कारोबार की गुंजाइश आगामी दिनों में बढ़ेगी। अब धाराएं संशोधित कर दी गई हैं ताकि प्रवर्तकों को मोटे तौर पर समाधान योजना से दूर रखा जा सके। विश्लेषकों के मुताबिक, साथ ही बैंकों की तरफ से हर मामले में दी जाने वाली छूट भी ज्यादा होगी और ये चीजें एआरसी को पंसद आएंगी। एआरसी कारोबार में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति है और यह कारोबार संयुक्त उद्यम के जरिए परिचालित होता है जहां विदेशी फंड स्थानीय एआरसी में हिस्सेदारी ले रहे हैं ताकि स्थानीय दबाव वाली परिसंपत्तियों को खरीद सके। आरबीआई के निर्देश के बाद स्थानीय एआरसी अब उनके बड़े निशाने पर हैं।यह जानकारी एक एआरसी के वरिष्ठ अधिकारी ने दी। हालांकि बहुगुणान ने पहले कहा था कि दबाव वाली संपत्ति कारोबार में विदेशी पूंजी पाने में मुश्किल नहीं होती। आरबीआई ने यह भी कहा है कि बोर्ड में कम से कम आधे सदस्य स्वतंत्र होने चाहिए, लेकिन बहुगुणा ने कहा कि यह पहले से ही एआरसी में है।
 
केंद्रीय बैंक ने कहा कि ऋण को परिवर्तित करने के बाद अधिग्रहीत शेयरों का महीने में कम से एक बार बाजार के हिसाब से आकलन जरूर होना चाहिए। इसके अतिरिक्त एआरसी को किसी क्षेत्र विशेष की कंपनी के प्रबंधन के लिए समिति बनाने की संभावना तलाशनी चाहिए, जिसके पास फर्म या कंपनियों के परिचालन का अनुभव हो और जिन्हें कंपनी के प्रबंधन के लिए चुनने पर विचार किया जा सकता हो। 100 करोड़ रुपये के खुद के न्यूनतम फंड के अलावा इन शर्तों का पालन पहले से ही सभी एआरसी कर रही हैं।
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