बढ़ रही है उधारी की रफ्तार : आरबीआई

बीएस संवाददाता |  Dec 06, 2017 09:58 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर ऊर्जित पटेल एवं अन्य वरिष्ठï अधिकारियों ने वित्त वर्ष 2018 के लिए पांचवीं द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद मीडिया से बातचीत की। उन्होंने प्रमुख नीतिगत दरों को अपरिवर्तित रखने के केंद्रीय बैंक के निर्णय, नकदी प्रवाह की स्थिति, आर्थिक वृद्धि और बैंक उधारी की स्थिति के बारे में बताया। मुख्य अंश:


यदि वृद्धि की रफ्तार नहीं बढ़ती है और मुद्रास्फीति का दबाव बरकरार रहता है तो आप किसे अधिक महत्त्व देंगे?
 
ऊर्जित पटेल: हमारा तटस्थ रुख है जिसका मतलब यह हुआ कि आगामी महीनों और तिमाहियों के आंकड़ों के आधार पर हम मौद्रिक नीति के बारे में कोई निर्णय लेंगे। इसलिए तटस्थ रुख का कारण यह है कि आपके सामने सभी संभावनाएं मौजूद होंगी। आगामी महीनों में हम वृद्धि और मुद्रास्फीति दोनों आंकड़ों पर गंभीरतापूर्वक गौर करेंगे।
 
नकदी प्रवाह कम होता दिख रहा है और बैंक थोक जमा दरों में वृद्धि पहले ही शुरू कर चुके हैं। क्या दरों में कटौती का फायदा ग्राहकों को मिल पाएगा?
 
पटेल: आपको थोक जमा की मौजूदा दर पर गौर करना चाहिए और देखना चाहिए कहां इसमें वृद्धि की गई है। और फिर यह मात्रात्मक के बजाय कहीं अधिक गुणात्मक आकलन है। मेरी जानकारी के अनुसार, थोक जमा दर काफी कम थी। दूसरा, मैं नहीं जानता कि नकदी प्रवाह कम होने से आपका क्या अभिप्राय है क्योंकि हमारी भारित औसत कॉल दर लगातार नीतिगत रीपो दर से कम है। 
 
विरल आचार्य: मैं समझता हूं कि बाजार शायद इस तथ्य को समायोजित कर रहा है कि हम थोड़े समय के लिए उल्लेखनीय अधिशेष की स्थिति में थे लेकिन अब हम तटस्थ की स्थिति तक पहुंच रहे हैं। जब आप तटस्थ रहेंगे तो कभी आपको नकदी प्रवाह बढ़ाने और कभी सोखने की जरूरत होगी।
 
बैंक खातों को आधार से जोडऩा कितना कठिन है? बैंक कितने तैयार हैं?
 
एनएस विश्वनाथन: हमने कहा है कि शुरुआत में बैंक खातों से आधार को जनसांख्यिकीय आधार पर जोड़ा जाना चाहिए क्योंकि इससे  ज्यादा लोगों को इसके दायरे में लाया जा सकता है। इसमें हमें कोई समस्या नहीं दिख रही है।
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