'फंसे कर्ज पर अग्रिम नकदी की शर्त ठीक नहीं'

देव चटर्जी और ईशिता आयान दत्त | मुंबई/कोलकाता Dec 21, 2017 10:04 PM IST

फंसे कर्ज के लिए बैंकों द्वारा निर्धारित नई मूल्यांकन शर्त ने बोलीदाताओं को दबाव में ला दिया है क्योंकि अब बोली के ऑफर के साथ बैंक को चुकाई जाने वाली अग्रिम नकदी को अधिक महत्त्व दिया जा रहा है जबकि पहले कर्ज में फंसी कंपनी में इक्विटी निवेश को अधिक महत्त्व दिया जाता था।  बोलीदाताओं का कहना है कि ऋण देनदारियां लेने और दबाव वाली परिसंपत्तियों में निवेश करने के अलावा बैंकों को अग्रिम तौर पर नकदी चुकाना बड़ी परिसंपत्तियों की बोली के लिए उपयुक्त नहीं होगा।

 
बोलीदाता से नजदीकी से जुड़े एक सूत्र ने कहा, 'दबाव वाली परिसंपत्ति के लिए रखी गई अग्रिम नकदी दबाव वाली परिसंपत्तियों में निवेश के बजाय बैंकों के पास जाएगी। अग्रिम के मामले को अधिक महत्त्व देकर बोलीदाताओं को उस कंपनी में निवेश करने से हतोत्साहित किया जा रहा है जिसे कायाकल्प के लिए कोष की जरूरत है।' इस शर्त का मतलब यह भी है कि बोलीदाताओं को परिसंपत्ति में निवेश के बजाय बैंकों को अधिक नकदी देने के लिए एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करनी होगी।
 
बैंकों द्वारा भूषण स्टील, भूषण पावर ऐंड स्टील, एस्सार स्टील, टाटा स्टील से इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स, जेएसडब्लयू स्टील, आर्सेलरमित्तल और वेदांत के लिए आक्रामक रूप से बोली लगाए जाने की संभावना है। इस सप्ताह बोलीदाताओं को भेजी गई मूल्यांकन शर्त से बोलीदाता और उनके सलाहकार फिर से रणनीति बनाने में जुट गए हैं। एक बोलीदाता ने कहा, 'हमें एकदम नए सिरे से बोली प्रक्रिया की योजना तैयार करनी है क्योंकि बैंक कंपनी में निवेश के बजाय अपने लिए अधिक नकदी चाहते हैं।' इन सभी कंपनियों के लिए बोली प्रक्रिया में अगले साल तक के लिए विलंब हुआ है क्योंकि बैंक सभी कंपनियों के लिए एक समान शर्त चाहते हैं।
 
बैंकों ने किसी तरह के कानूनी पचड़े से बचने के लिए एक समान मूल्यांकन प्रणाली पर जोर दिया है। इससे पहले प्रक्रिया यह थी कि ईओआई की स्वीकृति के बाद ऋणदाताओं की समिति मूल्यांकन शर्त निर्धारित करेगी। लेकिन पिछले सप्ताह यह निर्णय लिया गया कि आरबीआई की इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया में 12 कंपनियों के लिए एक समान मूल्यांकन मानक होगा। मानक में सात शर्तें हैं जिसे गुणात्मक और मात्रात्मक में विभाजित किया गया है। मात्रात्मक हिस्से में, अधिकतम महत्व अग्रिम नकदी को दिया गया है। वहीं गुणात्मक हिस्से में कायाकल्प का अनुभव, पिछला ट्रैक रिकॉर्ड, दिवालिया इरादतन है या नहीं, आदि को शामिल किया गया है।  उद्योग के विश्लेषकों का कहना है कि अग्रिम नकदी घटक बोली प्रक्रिया को भूषण स्टील, भूषण पावर ऐंड स्टील या एस्सार स्टील जैसी बड़ी कंपनियों तक सीमित करता है। हालांकि टाटा समूह और जेएसडब्ल्यू स्टील जैसी बड़ी घरेलू कंपनियां विस्तार की प्रतिबद्घता पहले ही जता चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने अपना ऋण भी घटाया है। इसलिए जहां इनमें से ज्यादातर कंपनियां निजी इक्विटी के साथ आगे बढ़ रही हैं या अन्य तरह से कोष की व्यवस्था की है।
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