इसॉप को लेकर बैंक कर्मी भिड़े

नम्रता आचार्य | कोलकाता Jan 07, 2018 09:34 PM IST

सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंक, यूनाइटेड बैंंक आफ इंडिया (यूबीआई) और इलाहाबाद बैंक अपने कर्मचारियों के लिए इंंम्प्लॉई स्टॉक ऑप्शन (इसॉप) प्लान पेश करने पर विचार कर रहे हैं। इसे लेकर अधिकारियों व कर्मचारियों में खींचतान सतह पर आ गई है। ऐसा पहली बार हो रहा है जब सरकारी बैंक अपने कर्मचारियों के लिए इसॉप जारी कर रहे हैं।  हाल ही में यूबीआई के निदेशक मंडल ने इसॉप के माध्यम से 5 करोड़ इक्विटी शेयर एक या कई बार में जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इलाहाबाद बैंक ने भी इसॉप के माध्यम से 5 करोड़ इक्विटी शेयर जारी करने के लिए बोर्ड से मंजूरी हासिल कर ली है। इलाहाबाद बैंक जहां इश्यू के माध्यम से 3 से 3.5 अरब रुपये जुटाने पर विचार कर रहा है, वहींं यूबीआई करीब 85 करोड़ रुपये जुटाने पर विचार कर रहा है। दोनों बैंक ज्ल ही आम बैठक करेंगे, जिससे शेयरधारकों की मंजूरी मिल सके। 

 
यूबीआई के प्रबंध निदेशक पवन कुमार बजाज ने कहा कि इसॉप जारी करना, बैंक मेंं सरकार की हिस्सेदारी 1.5 प्रतिशत के करीब कम करने जैसा है।  सरकारी बैंंक इस समय धन जुटाने के लिए जूझ रहे हैं, जिससे गैर निष्पादित संपत्तियों और कम कर्ज वितरण के संकट से निपटा जा सके। इस तरह से ये दो बैंंक अब अपने अधिकारियों के संगठन पर निर्भर हैं, जिनकी संख्या कुल कार्यबल का 40-45 प्रतिशत है। कर्मचारी इसे लेने के लिए बहुत उत्साहित नहीं हैं। बहरहाल अधिकारियों के संगठन ने साफ कर दिया है कि इसॉप कमचारियों के प्रदर्शन के साथ नहीं जोड़ा जाएगा। 
 
इलाहाबाद बैंक और यूबीआई दोनों के अधिकारियों के मुख्य संगठन आल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन के महासचिव डी थॉमस फ्रैंको ने कहा, 'हम इसॉप का विरोध नहीं कर रहे हैं। यह प्रदर्शन से नहीं जुड़े हुए हैं।'  आल इंडिया बैंंक इंप्लाइज एसोसिएशन के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने कहा कि हम न इसका कोई वाणिज्यिक मूल्य देख रहे हैं और न यह सरकारी बैंकों में हिस्सेदारी लेने की हमारी विचारधारा के अनुरूप है। साथ ही कर्मचारी के रूप में हमने नहीं लगता कि इसॉप कर्मचारियों को प्रेरित करने का साधन बन सकता है। अन्य सरकारी बैंंक भी इन दोनों बैंकों की सफलता के बाद इस राह को अपना सकते हैं।
 
एक अधिकारी ने कहा कि दो साल पहले इसॉप जारी करने का विचार पेश किया था, लेकिन सरकारक ने इसे मंजूरी नहीं दी। अधिकारी ने कहा हमने करीब 2 साल पहले कर्मचारियों के लिए इसॉप जारी करने का प्रस्ताव सरकार के पास भेजा था, लेकिन सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद कभी इस तरह की कवायद नहींं की गई। बहरहाल मार्च 2017 में वित्त मंत्रालय ने अगले साल से सरकारी बैंकों को अपने कर्मचारियों को स्टॉक का विकल्प देने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी। 
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