इस साल ब्याज दरें स्थिर रख सकता है रिजर्व बैंक

अनूप रॉय | मुंबई Jan 07, 2018 09:35 PM IST

मुख्य नीतिगत दर

अर्थशास्त्रियों, बॉन्ड डीलरों का कहना है कि पूरे कैलेंडर वर्ष में संभवत: रिजर्व बैंक नहीं बढ़ाएगा दरें
पिछले 3 महीने से बॉन्ड प्राप्तियों में तेज बढ़ोतरी के बावजूद ऐसा होने की संभावना

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) 2018 में मुख्य नीतिगत दरें स्थिर रख सकता है, भले ही पिछले 3 महीने में बॉन्ड प्राप्तियां तेजी से बढ़ी हैं। अर्थशास्त्रियों और बॉन्ड डीलरोंं का कहना है कि दरों में बढ़ोतरी मौजूदा कैलेंडर वर्ष में होने की संभावना नहीं है, साथ ही दरों में कटौती की भी कोई संभावना नहीं है।  पिछले साल अक्टूबर महीने में यील्ड में तेज बढ़ोतरी शुरू हुई, जब 10 साल का बॉन्ड प्राप्तियां करीब 6.65 प्रतिशत रहा। अब प्राप्ति 7.33 प्रतिशत है। इसी अवधि के दौरान एक साल का ओवरनाइट इंडेक्स स्वैप (ओआईएस), जिसका इस्तेमाल दरोंं की हेजिंग में होता है, 6.09 प्रतिशत से बढ़कर 6.46 प्रतिशत हो गया। सैद्धांतिक रूप से देखें तो ओआईएस दर में बढ़ोतरी से दरों में बढ़ोतरी के संकेत मिल सकते हैं, लेकिन इस समय ओआईएस में बदलाव सीधे तौर पर यील्ड में बढ़ोतरी से जुड़ा हुआ है। 

बॉन्ड मार्केट के वरिष्ठ विशेषज्ञ अनंत नारायण ने कहा, 'अगर यील्ड बहुत ज्यादा बढ़ रहा हो तो ऐसी स्थिति में ओआईएस में कोई बदलाव न हो, यह मुश्किल है। आधार देखने से पता चवता है कि 2018 में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी आपूर्ति से ज्यादा जुड़ी हुई है और यह संभव है कि फरवरी का बजट चुनावी बजट हो और वह खर्चीले प्रकृति का हो।'  नारायणन ने कहा कि  10 साल के नए बेंचमार्क पेपर पेश किए जाने से भी यील्ड को बल मिला है। दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद के बगैर यील्ड में बदला को तर्कसंगत नहीं ठहराया जा सकता है।

बाजार अभी दरों में तत्काल किसी बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं कर रहा है। ऐक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री सौगात भट्टाचार्य ने कहा, '2018 में पूरे साल के दौरान दरों में बढ़ोतरी की संभावना तुलनात्मक रूप से कम है। वृद्धि दर में सुधार हो रहा है, वहीं उतार चढ़ाव बना हुआ है। दरों में बढ़ोतरी ब्याज की लागत बढ़ेगी। दरों में बदलाव की संभावनाएं सीमित हैं और दरों में बढ़ोतरी को लेकर बाजार बहुत संवेदनशील है।' मौद्रिक नीति की पिछली बैठक के ब्योरे से पता चलता है कि बाहरी सदस्य रवींद्र ढोलकिया को छोड़कर मौद्रिक नीति समिति के 5 अन्य सदस्यों ने नीतिगत दरें यथावत रखने के पक्ष में मत दिया। 

नोमुरा ने 20 दिसंबर की अपनी रिपोर्ट में कहा है, '7 फरवरी को होने वाली अगली नीतिगत बैठक में हम उम्मीद करते हैं कि एमपीसी के 5 सदस्य फिर यथास्थिति बरकरार रखने का पक्ष लेंगे। लेकिन हम यह जोखिम देख सकते हैं कि रवींद्र ढोलकिया अलग राय रखें।' रिपोर्ट में कहा गया है, 'हम उम्मीद करते हैं कि 2018 में नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं होगा।'
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