बैंकों के पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड की परिपक्वता अवधि अलग

सोमेश झा | नई दिल्ली Jan 19, 2018 09:50 PM IST

केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को मजबूती देने के लिए 1.35 लाख करोड़ रुपये के पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड की परिपक्वता की विभिन्न अवधि पर विचार कर रही है। केंद्र सरकार को डर है कि अगर परिपक्वता अवधि में एकरूपता रही तब सरकार पर वित्तीय मोर्चे के लिहाज से दबाव उस वक्त बढ़ेगा जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बॉन्ड भुनाएंगे। सरकार विशेष कंपनी के जरिये पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड के दूसरे चरण की पेशकश करने पर भी विचार कर रही है। इस तरह सरकार 1993-94 के पूर्ववर्ती पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड से अलग कोशिश करने जा रही है जब स्थायी बॉन्ड में तब्दील होने से पहले इसके सभी बॉन्ड की परिपक्वता की एक निश्चित अवधि हुआ करती थी। 
 
वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं, 'पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड की अलग परिपक्वता अवधि हो सकती है ताकि जब बॉन्ड को भुनाया जाए तब सरकार पर एक ही बार में बैंक को पूरी रकम का भुगतान करने का दबाव न रहे।' आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज प्राइमरी डीलरशिप के मुख्य अर्थशास्त्री ए प्रसन्ना का कहना है, 'बॉन्ड की परिपक्वता की विभिन्न अवधि सार्थक है क्योंकि नियमित उधारी कार्यक्रम पहले से ही जारी है। ऐसे में एक ही वक्त में सारी योजनाओं के परिपक्व होने पर बाजार पर भी दबाव बनेगा।' उनका कहना है कि बॉन्ड की परिपक्वता अवधि 10 साल से अधिक होनी चाहिए क्योंकि इससे कम अवधि से सरकार के खजाने पर असर पड़ सकता है। 
 
इस महीने वित्त मंत्रालय को इस वित्त वर्ष में 800 अरब अतिरिक्त खर्च करने की संसद ने मंजूरी दी थी ताकि बॉन्ड के जरिये सरकारी बैंकों का पुनर्पूंजीकरण किया जा सके। पिछले साल अक्टूबर में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दो सालों तक सरकारी बैंकों के 2.1 लाख करोड़ रुपये की पूंजीगत योजना की घोषणा की थी ताकि बैंकों के फंसे कर्जों की समस्या में मदद की जा सके। 
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