स्टेट बैंक के 20,000 करोड़ रुपये बट्टे खाते

भाषा | नई दिल्ली Feb 11, 2018 09:42 PM IST

देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने 2016-17 में 20,339 करोड़ रुपये के फंसे कर्ज को बट्टा खाते डाल दिया। यह सरकारी बैंकों में सबसे अधिक राशि है जो बट्टा खाते डाली गई है। इस प्रकार 2016-17 में बैंकों के बट्टा खाते में कुल मिलाकर 81,683 करोड़ रुपये की राशि डाली गई।  यह आंकड़े तब के हैं जब भारतीय स्टेट बैंक में उसके सहयोगी बैंकों का विलय नहीं किया गया था। सरकारी आंकड़े दिखाते हैं कि वित्त वर्ष 2012-13 में सरकारी बैंकों का कुल बट्टा खाता 27,231 करोड़ रुपये था। इस प्रकार 5 साल की अवधि में यह राशि तीन गुना बढ़ गई है। 
 
वित्त वर्ष 2013-14 में सरकारी बैंकों ने 34,409 करोड़ रुपये के फंसे कर्ज को बट्टा खाते डाला था। वित्त वर्ष 2014-15 में यह राशि 49,018 करोड़ रुपये, 2015-16 में 57,585 करोड़ रुपये और मार्च 2017 में समाप्त हुए वित्त वर्ष में 81,683 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।  स्टेट बैंक के अलावा पंजाब नैशनल बैंक ने भी 2016-17 में 9,205 करोड़ रुपये बट्टा खाते में डाले हैं। इसके बाद बैंक ऑफ इंडिया ने 7,346 करोड़ रुपये, केनरा बैंक ने 5,545 करोड़ रुपये और बैंक ऑफ बड़ौदा ने 4,348 करोड़ रुपये बट्टा खाते डाले हैं। चालू वित्त वर्ष में सितंबर छमाही तक सरकारी बैंकों ने 53,625 करोड़ रुपये के कर्ज को बट्टे खाते डाला है।
 
रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक 30 सितंबर 2017 तक कुल 21 सरकारी बैंकोंं में से 9 बैंकोंं का सकल गैर निष्पादित संपत्ति अनुपात 15 प्रतिशत से ऊपर (कुल कर्ज बकाए में से खराब कर्ज का प्रतिशत) चला गया है। सार्वजनिक क्षेत्र के 14 बैंकों का सकल गैर निष्पादित संपत्ति अनुपात 12 प्रतिशत से ऊपर है। सरकारी बैंक इस समय गैर निष्पादित संपत्ति (एनपीए) या खराब कर्ज के बोझ से जूझ रहे हैं। इससे वित्तीय क्षेत्र दबाव में है। सरकार ने सरकारी बैंकों में बॉन्ड के माध्यम से अगले 2 साल मेंं 2.11 लाख करोड़ रुपये निवेश की घोषणा की है। 
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