फंसी संपत्तियों पर बैंकों को भारी चपत

ईशिता आयान दत्त और देव चटर्जी | कोलकाता/मुंबई Feb 11, 2018 10:41 PM IST

बैंकों को कर्ज पर औसतन 50 से 80 फीसदी नुकसान

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) की पहली सूची में शामिल 12 कंपनियों में से 9 मामलों के निपटान में बैंकों को अपने कुल बकाया कर्ज में औसतन 50 से 80 फीसदी की चपत लग सकती है। यह आकलन इन कंपनियों की बोली प्रक्रिया और पांच मामलों में लगाई गई बोली के आधार पर किया गया है। हालांकि भूषण स्टील के मामले में बैंकों को सबसे कम नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके लिए जेएसडब्ल्यू स्टील ने बैंकों को 28,000 करोड़ रुपये की नकद और 1,700 करोड़ रुपये की इक्विटी देने की पेशकश की है। भूषण स्टील पर बैंकों का करीब 56,000 करोड़ रुपये का बकाया है। बैंकों को सबसे ज्यादा नुकसान ज्योति स्ट्रक्चर्स की वजह से उठाना पड़ेगा क्योंकि उसके लिए धनाढ्य निवेशकों के एक समूह की ओर से एकमात्र बोली मिली है।

अब तक ऋणशोधन प्रक्रिया के नतीजे बैंकों के लिए मिले-जुले रहे हैं और कुछ मामलों में दोबारा बोली लगाने और संशोधित पेशकश करने की प्रक्रिया चल रही है। आलोक इंडस्ट्रीज के लिए दोबारा बोली लगाई जा रही है। एमटेक ऑटो के मामले में संशोधित पेशकश की गई है। लिबर्टी हाउस ने इस कंपनी के लिए बोली में संशोधन किया है। पहले कर्जदाताओं ने लिबर्टी हाउस और डेक्कन वैल्यू इन्वेस्टमेंट की पेशकश को खारिज कर दिया था क्योंकि उनकी पेशकश परिसमापन मूल्य से भी कम थीं। लिबर्टी हाउस के प्रवक्ता ने संशोधित बोली की पुष्टिïकी है।

कुछ मामलों में ऊंची बोली लगी है। उदाहरण के तौर पर इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स के लिए वेदांत ने 4,500 करोड़ रुपये की बोली लगाई है, लेकिन टाटा स्टील ने ऋणदाताओं की समिति को पत्र लिखकर अपनी पेशकश में संशोधन करने की बात कही है। मोनेट के लिए जेएसडब्ल्यू स्टील ने अपनी पहले की बोली 2,470 करोड़ रुपये बढ़ाकर 2,700 करोड़ रुपये कर दी है। भूषण स्टील और भूषण पावर ऐंड स्टील ने हाल ही में बोलियां आमंत्रित की हैं, वहीं सोमवार को एस्सार स्टील के लिए बोलियां आमंत्रित की जाएंगी। 

सूत्रों ने कहा कि निजी क्षेत्र के बैंक मोल-भाव करने और जल्द से जल्द फंसी संपत्तियां बेचने और कर्ज पर 50 से 60 फीसदी तक का नुकसान सहने को तैयार हैं लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ ऐसा नहीं है। सार्वजनिक क्षेत्र बैंक बाहर किसी तरह का कोई समझौता कर मामले को निपटाने के बजाय एनसीएलटी के तहतï ऋणशोधन प्रक्रिया में जाने वाली कंपनियों को तवज्जो दे रहे हैं। लेकिन लैंकों इन्फ्राटेक जैसे कुछ मामलों को लेकर कर्जदाता संशय में है क्योंकि इसके लिए चार कम ज्ञात कंपनियों ने बोली लगाई है।

रिजर्व बैंक ने ऋणशोधन के लिए 12 कंपनियों को चिह्निïत किया है, वहीं बैंक इससे इतर भी काफी नुकसान या कम भाव पर फंसी संपत्तियां बेची हैं। उदाहरण के तौर पर सीमेंट फर्म मुरली इंडस्ट्रीज को बैंकों ने डालमिया सीमेंट के हाथों 79 फीसदी के नुकसान के साथ बेचा था। लेकिन बिनानी सीमेंट के मामले में इसकी परिसंपत्तियों को बकाया कर्ज से अधिक मूल्य पर बेचा गया था।

एस्सार स्टील के लिए बोली आज

रुइया की अल्पांश हिस्सेदारी के साथ रूस के वीटीबी बैंक की अगुआई वाला कंसोर्टियम सोमवार को एस्सार स्टील के लिए बोली लगाने के लिए तैयार है। माना जा रहा है कि बोली 3,000 करोड़ रुपये के तक पहुंच सकती है। आर्सेलरमित्तल और टाटा भी इस कंपनी को खरीदने की दौड़ में है। एस्सार स्टील की गुजरात के हजीरा में 1 करोड़ टन सालाना उत्पादन की क्षमता है और दिसंबर 2015 में बैंक के कर्ज भुगतान मेंं चूक के बाद एनसीएलटी की कार्यवाही का सामना कर रही है। सूत्रों के मुताबिक आर्सेलरमित्तल इसके लिए अकेले बोली लगा सकती है। भूषण स्टील, भूषण पावर और इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स के लिए दूसरी सबसे बड़ी बोलीदाता के तौर पर उभरने के बाद टाटा इस कंपनी के लिए संकुचित दायरे में बोली लगा सकती है। तीनों कंपनियों के अधिग्रहण में सबसे आगे रहने वाली जेएसडब्ल्यू स्टील एस्सार के लिए बोली नहीं लगा रही है। कंपनी के एक अधिकारी ने इसकी पुष्टि की।
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