पीएनबी में 113 अरब की धोखाधड़ी

सोमेश झा, नम्रता आचार्य और अनूप रॉय | नई दिल्ली/कोलकाता/मुंबई Feb 14, 2018 10:01 PM IST

कैसे हुआ यह सब...

डायमंड आर यूएस, सोलर एक्सपोट्र्स और स्टेलर डायमंड्स ने साझेदारों नीरव मोदी, उनके मामा मेहुल चोकसी और अन्य के साथ पिछले साल फरवरी में एलओयू के लिए पीएनबी से किया संपर्क
मुंबई में ब्रांडी हाउस शाखा के पीएनबी अधिकारियों ने जारी किया फर्जी एलओयू, बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम में नहीं रखा गया इसका कोई रिकॉर्ड
अधिकारियों ने हॉन्ग कॉन्ग में ऐक्सिस बैंक और इलाहाबाद बैंक की शाखाओं को बायर्स क्रेडिट जारी करने का दिया निर्देश
कंपनियों के इस साल जनवरी में एलओयू के लिए एक बार फिर बैंक से संपर्क करने पर मामला हुआ उजागर
कंपनियों ने एलओयू के लिए 100 प्रतिशत मार्जिन देने से किया इनकार, कहा पहले भी वे कर चुके हैं ऐसे लेनदेन
बकाया एलओयू की पड़ताल के लिए बैंक रिकॉर्ड खंगालने में जुटा

इन बैंकों के नाम अब तक आए सामने
पीएनबी, ऐक्सिस बैंक और इलाहाबाद बैंक

क्या है मामला?
पीएनबी ने हीरा कारोबारी नीरव मोदी और अन्य को कथित तौर पर फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) किया जारी।
इन्होंने भारत से बाहर इसे ऐक्सिस बैंक और इलाहाबाद बैंक में भुनाया।
बैंकों से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कंपनियों ने आयात बिल चुकाने में नहीं किया।

सार्वजनिक क्षेत्र के पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) के साथ वैश्विक आभूषण कारोबारी नीरव मोदी और उनके रिश्तेदारों द्वारा अपनी कुछ कंपनियों के जरिये 113 अरब रुपये की धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। यह भारतीय उद्योग जगत के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला हो सकता है। पीएनबी ने स्टॉक एक्सचेंजों को आज इस फर्जीवाड़े की जानकारी दी।  पीएनबी ने कहा कि उसके दो कर्मचारी भी इस घोटाले में शामिल थे। इस बीच बैंक ने 10 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया। इस मामले में कोर बैंकिंग सिस्टम को दरकिनार कर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संचार प्रणाली (स्विफ्ट) का इस्तेमाल कर अन्य भारतीय बैंकों की विदेश शाखाओं को भुगतान के लिए नोट्स जारी किए गए। 

अन्य बैंकों के अधिकारियों ने इस धोखाधड़ी से खुद का बचाव करते हुए कहा कि भुगतान का अनुरोध पीएनबी की तरफ से किया गया था, इसलिए इसकी देनदारी पीएनबी की बनती है। हालांकि अन्य बैंकों ने भी नीरव मोदी की कंपनियों को पैसे दिए हैं। नीरव ने ऋणदाताओं को ईमेल भेजकर भरोसा दिया है कि वह उसके सभी बकाये चुका देगी। मोदी नेे कहा कि उनका ब्रांड फायरस्टोन डायमंड जिसका मूल्य 105 अरब रुपये है, उसकी बिक्री की जानी है।

ताजा घोटाला बैंकिंग प्रणाली में धोखाधड़ी करने का पुराना तरीका है। इसमें मोदी और उनके परिवार के सदस्यों की कंपनियों को पीएनबी की मुंबई शाखा से समझौता पत्र (एलओयू) जारी किया गया था। एलओयू आयातक (इस मामले में मोदी) को बैंक द्वारा जारी किया जाता है। यह एक तरह से बैंक गारंटी के तौर पर काम करता है, जिसे आयातक कम दर पर अन्य बैंकों को बेचकर पैसे जुटा सकता है। इसके आधार पर आयातक पैसे या साख पत्र जुटाकर अपने ग्राहकों को भुगतान कर सकता है। जारीकर्ता बैंक अन्य बैंकों की विदेशी शाखाओं को स्विफ्ट नेटवर्क के जरिये संदेश भेजता है जिसके आधार पर एलओयू के एवज में तत्काल ग्राहक को भुगतान कर दिया जाता है। इसके बाद एलओयू धारक जारीकर्ता बैंक के पास जाता है और अपना बकाया चुका देता है। हालांकि एलओयू में धोखाधड़ी का जोखिम रहता है, इसलिए जारीकर्ता बैंक ग्राहक को समान मूल्य की संपत्ति या नकदी स्थानीय शाखा में जमा कराने पर जोर देता है। 

पंजाब नैशनल बैंक ने बंबई स्टॉक एक्सचेंज को बताया कि कुछ खाताधारकों ने अपने फायदे के लिए मुंबई की एक शाखा के बैंक कर्मचारियों के साथ मिलकर करीब 1.78 अरब डॉलर का अनधिकृत लेनदेन और धोखाधड़ी की है। बैंक ने कहा कि उसने मामले की जानकारी जांच एजेंसियों को दे दी है। इस खबर से पीएनबी का शेयर 9.8 फीसदी लुढ़ककर 145.80 रुपये पर आ गया। हालांकि अपनी सूचना में पीएनबी ने धोखाधड़ी में शामिल फर्म या किसी व्यक्ति के नाम का खुलासा नहीं किया है। बैंक के अधिकारियों सीबीआई से पहले की गई शिकायत के संबंध में नोटिस की पुष्टिï की है। इसकी प्राथमिकी रिपोर्ट (एफआईआर) की प्रति सीबीआई की वेबसाइट पर है।

सोमवार को पीएनबी ने सीबीआई के पास दो नई शिकायत दर्ज कराई। एक मामले में बैंक ने आभूषण कंपनी पर आरोप लगाया है। सीबीआई सूत्रों ने कहा कि वह तय नहीं कर पा रहे हैं कि बैंक नया एफआईआर करना चाहता है या पहले के एफआईआर में ही इस शिकायत को शामिल कराना चाहता है। पहले एफआईआर में गीतांजलि जेम्स के प्रमुख और मोदी के मामा मुकुल चोकसी का भी नाम है। चोकसी ने बुधवार को होने वाली अपनी बोर्ड बैठक भी टाल दी। वित्तीय सेवा विभा के संयुक्त सचिव लोक रंजन ने कहा, 'जहां तक जानकारी है मुझे नहीं लगता कि यह मामला नियंत्रण से बाहर या बड़ी चिंता की वजह है।' वित्त मंत्रालय ने इस हफ्ते के अंत तक फर्जी लेनदेन का पूरा ब्योरा मांगा है।

मोदी की धोखाधड़ी का मामला पहली बार पिछले महीने की आखिर में सामने आया था जब पीएनबी को उनके दो कर्मचारियों की डायमंड आर यूएस, सोलर एक्सपोट्र्स और स्टेलार डायमंड्स के बीच सांठगांठ का पता चला था। इसमें एक उप शाखा प्रबंधक और एक क्लर्क शामिल था। यह शाखा प्रबंधक अब रिटायर हो चुका है। इन कर्मचारियों ने उचित प्रक्रिया अपनाए बगैर 2.8 अरब रुपये मूल्य के फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग्स (एलओयू) जारी किया था। पीएनबी द्वारा सीबीआई को दी गई शिकायत के मुताबिक इन कंपनियों में कारोबारी नीरव मोदी, उनके भाई निशाल मोदी, पत्नी अमी नीरव मोदी और मामा मेहुल चीनूभाई चोकसी  (गीतांंजलि जेम्स के मालिक) साझेदार हैं।

इस साल 16 जनवरी को इन कंपनियों ने मुुंबई में पीएनबी की ब्रैडी हाउस शाखा से संपर्क किया और विदेश में आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान करने के लिए एलओयू पत्र के जरिये बायर्स क्रेडिट की अनुमति मांगी। बैंक ने क्रेडिट जुटाने के लिए कंपनियों को कम से कम 100 फीसदी कैश मार्जिन सौंपने को कहा। इस पर कंपनियों ने कहा कि वे पहले भी बैंक से इस तरह की सेवाएं ले चुकी हैं लेकिन बैंक के रिकॉर्ड में कुछ और ही कहानी थी। इससे बैंक के अधिकारियों को संदेह हुआ।

जांच करने पर पता चला कि बैंक के सेवानिवृत्त उप प्रबंधक और एक क्लर्क ने पिछले साल 9 फरवरी से 14 फरवरी के बीच 2.8 अरब रुपये के 8 फर्जी एलओयू जारी किए थे। उप प्रबंधक तब विदेशी मुद्रा विनिमय विभाग में तैनात थे और आयात सेक्शन को देख रहे थे। इन कर्मचारियों ने बैंक व्यवस्था में प्रविष्टिï के बिना अधिकारियों से जरूरी मंजूरी हासिल की थी ताकि इस लेनदेन का पता न चल पाए। उन्होंने हॉन्गकॉन्ग में ऐक्सिस बैंक और इलाहाबाद बैंक की शाखाओं को बायर्स क्रेडिट जुटाने के लिए स्विफ्ट निर्देश दिए थे। इन बैंकों को भुगतान की तिथि 25 जनवरी 2018 थी। 

बैंक उन बकाया एलओयू का पता लगाने के लिए स्विफ्ट रिकॉर्ड की जांच कर रहा है जो बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम में दर्ज नहीं हैं। इसलिए धोखाधड़ी के नए मामले सामने आ रहे हैं। बैंकरों का कहना है कि जब तक दूसरे बैंकों के अधिकारियों की सांठगांठ की पुष्टिï नहीं होती है तब तक उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस मामले की पूरी देनदारी पीएनबी की है क्योंकि उसी ने एलओयू जारी किए थे। 
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