बैंकों में धोखाधड़ी वाले लेनदेन पर एक नजर

अद्वैत राव पलेपू | मुंबई Feb 14, 2018 10:12 PM IST

बैंकिंग व्यवस्था में हर दिन विभिन्न तरह की धोखाधड़ी वाले लेनदेन होते हैं। लेकिन ये शायद ही सुर्खियां बनती हैं जबतक कि बैंक के अधिकारियों की ऐसे धोखाधड़ी करने वालों के साथ सांठगांठ होती है। साल 2012 से 2016 के बीच सरकारी बैंकों ने विभिन्न बैंंकिंग धोखाधड़ी के चलते कुल 227.43 अरब रुपये गंवाए। यह जानकारी आईआईएम बेंगलूरु के अध्ययन से मिली। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आरबीआई के आंकड़ों से हवाले से संसद में कहा था कि बैंकिंग धोखाधड़ी के 25,600 से ज्यादा मामले दिसंबर 2017 तक दर्ज हुए हैं और इसके जरिए 1.79 अरब रुपये की धोखाधड़ी हुई है।
 
धोखाधड़ी वाले लेनदेन के वर्गीकरण व इसकी रिपोर्टिंग के लिए जुलाई 2014 से ही आरबीआई का स्पष्ट दिशानिर्देश है। इसमें कहा गया है कि 25 करोड़ रुपये से ज्यादा वाले लेनदेन के बारे में सरकारी बैंकों को सीबीआई की बैंकिंग सिक्योरिटी ऐंड फ्रॉड सेल (बीएसएफसी) को जानकारी देनी होगी, वहीं प्राइवेट बैंकों को 1 करोड़ से ज्यादा के धोखाधड़ी वाले लेनदेन की जानकारी कंपनी मामलों के मंत्रालय के गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय को देनी होगी। सभी बैंकों को 25 लाख या इससे ज्यादा वाली धोखाधड़ी की जानकारी आरबीआई की सेंट्रल फ्रॉड मॉनिटरिंग सेल को देनी होती है। पिछले साल मार्च में आरबीआई की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2017 के पहले नौ महीने में 1 लाख रुपये या इससे ज्यादा धोखाधड़ी वाले 455 मामले आईसीआईसीआई बैंक में पाए गए, एसबीआई में 429 मामले, स्टैंडर्ड चार्टर्ड में 244 मामले और एचडीएफसी बैंक में 237 ऐसे मामले पाए गए। एसबीआई के 64 कर्मचारी इसमें शामिल रहे, जबकि एचडीएफसी बैंक के 49 कर्मी और ऐक्सिस बैंक के 35 कर्मचारी इसमें शामिल पाए गए।
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