मोदी की फर्मों में काफी बेनामी रकम

श्रीमी चौधरी और अनूप रॉय | मुंबई Feb 16, 2018 10:08 PM IST

पंजाब नैशनल बैंक में 114 अरब रुपये की धोखाधड़ी का मुख्य अभियुक्त अरबपति ज्वैलरी डिजाइनर नीरव मोदी साल 2013 से ही केंद्रीय जांच एजेंसियों के जांच के घेरे में रहा है। मोदी व उनके मामा मेहुल चोकसी पर हुई आयकर जांच से 49 अरब रुपये की बेनामी रकम का पता चला है। पीएनबी के अधिकारियों ने नीरव मोदी समूह की फर्मों के लिए फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग दिया था और अधिकारियों के पास इसे जारी करने का अधिकार नहीं था। राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) और आयकर विभाग ने मोदी व उनकी तरफ से प्रवर्तित इकाइयों की जांच 2013 से 2017 के बीच की थी। इस अवधि में संभवत: कई एलओयू पीएनबी ने जारी किए थे या फिर विदेश में भारतीय बैंकों की शाखाओं के हक में जारी करने की प्रक्रिया में था, जो हीरे व मोती के आयात के लिए था।
 
एक बैंकर ने कहा, यह स्पष्ट है कि पीएनबी घटनाक्रम रातोंरात नहीं हुआ है और पीएनबी समेत विभिन्न अधिकारियोंं को ज्वैलरी फर्म की तरफ से अपनाए गए कारोबारी मॉडल की जानकारी थी। अभी मामले की जांच कर रही सीबीआई ने आईटी विभाग व डीआरआई से जांच रिपोर्ट मांगी है, जिससे एजेंसी को मदद मिल सकती है। सीबीआई के एक सूत्र ने यह जानकारी दी। जनवरी 2017 में नीरव मोदी और उनके सहयोगियों के यहां आईटी विभाग के तलाशी अभियान में कई महत्वपूर्ण सबूत मिले हैं। रिपोर्ट में मोदी की तरफ से अपनाए जाने वाले कामकाज के 10 तरीके की जानकारी दी गई है, जो मोदी व उनकी फर्म करवंचना के लिए करती थी। बिजनेस स्टैंडर्ड ने इस रिपोर्ट का अध्ययन किया है।
 
रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि नीरव मोदी की फर्म की कुल नकद प्राप्तियां खुदरा कारोबार में 2.52 अरब रुपये थी। इसमें से 1.6 अरब रुपये उन्हें डायमंड की बिक्री से मिले थे, जो खाते में दर्ज बिक्री कीमत से ज्यादा है। विदेशी संपत्ति के मोर्चे पर पाया गया कि मोदी ने व्यक्तिगत संपत्ति देकर जर्सी में मोंटे क्रिस्टो ट्रस्ट बनाया था और इसके लाभार्थी थे। मोदी ने कहा था कि ट्रस्ट कभी भी परिचालन में नहींं था और इसकी कोई परिसंपत्ति नहीं है। आईटी अधिकारी विदेशी अधिकारियों के साथ उनके बयानों का सत्यापन करने की प्रक्रिया में हैं।
 
मोदी की मुख्य कंपनी फायरस्टार इंटरनैशनल को मार्च 2013 और अप्रैल 2014 के बीच जेड ब्रिज होल्डिंग्स और फॉरकॉम वल्र्डवाइड इन्वेस्टमेंट से 2.84 अरब रुपये मिले थे। यह कंपनी क्रमश: साइप्रस और मॉरीशस में है। रिपोर्ट में कहा गया है, इन फंडों के स्रोत आदि की जानकारी नहीं दी गई है। हालांकि इसने कहा है कि इन विदेशी इकाइयों की तरफ से जमा कराए गए दस्तावेज भारत में मोदी के कार्यालय में तैयार किए गए थे। एजेंसी ने यह भी पाया कि फायरस्टार को सिंगापुर के इस्लिंगटन इंटरनैशनल से अलग से 2.71 अरब रुपये मिले थे, जिनकी लाभार्थी मोदी की बहन पूर्वी मेहता बताई जाती है।
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