सीबीएस से नहीं जुड़ी हर प्रक्रिया

अनूप रॉय | मुंबई Feb 20, 2018 10:09 PM IST

सोसायटी फॉर वल्र्डवाइड इंटरबैंक फाइनैंशियल टेलिकम्युनिकेशंस (स्विफ्ट) सिर्फ एक प्रक्रिया है जो बैंकों में कोर बैंंकिंग सिस्टम (सीबीएस) के बाहर है। तकनीकी विशेषज्ञों के मुताबिक, अलग-अलग बैंकों में 68 से 169 प्रक्रियाएं थर्ड पार्टी मुहैया कराता है और बैंक इनमें से ज्यादातर को एकीकृत नहीं करता। लेकिन कुछ महत्वपूर्ण ऐप्लिकेशन को सिस्टम के साथ एकीकृत किया जाता है मसलन स्विफ्ट। उदाहरण के लिए निजी क्षेत्र के बैंकों में स्विफ्ट सीबीएस का हिस्सा है, ऐसा ही मामला भारतीय स्टेट बैंक के साथ है। हालांकि ज्यादातर सरकारी बैंकों में स्विफ्ट सीबीएस से बाहर है। यह बैंक प्रबंधन पर निर्भर करता है कि वह कौन से ऐप्लिकेशन को सीबीएस से जोडऩे का फैसला लेता है।
 
एक सरकारी बैंकर ने कहा, सीबीएस तक और राइटिंग कोड तक पहुंचने की अनुमति पर्याप्त नहीं है। आपको इसे हजार बार चलाना होता है ताकि सिस्टम में खामी का पता चल सके। सरकारी बैंक के लिए यह अक्सर जटिल कवायद होती है, इसलिए थर्ड पार्टी के ज्यादातर सिस्टम सीबीएस के बाहर होते हैं। विशेषज्ञों ने कहा, दिलचस्प रूप से थर्ड पार्टी के ऐसे किसी भी ऐप्लिकेशन से संवेदनशील सूचना लीक हो सकती है और बैंक  अपने उत्पादों को एकीकृत करने के लिए पूरी तरह से सेवाप्रदाताओं पर निर्भर होते हैं।
 
वरिष्ठ बैंकिंग कंसल्टेंट अश्विन पारेख ने कहा, स्विफ्ट थर्ड पाटी सिस्टम का एक हिस्सा भर है। ट्रेड फाइनैंस के लिए मूरेक्स होता है, जिसका इस्तेमाल ब्लूमबर्ग व रॉयटर्स कैपिटल मार्केट के लिए करती है और कॉल सेंटर बिक्री व सेवा के लिए, एटीएम के लिए सहायक सेवा प्रदाता, मोबाइल ट्रांजेक्शन के लिए वॉलेट कंपनियां भी इसका इस्तेमाल करती हैं। अलग-अलग ऐप्लिकेशन के लिए बैंक थर्ड पार्टी समाधान प्रदाता के इंटरफेस का इस्तेमाल करता है। पारेख ने कहा, अच्छा सीटीओ अलग-अलग सिस्टम को सीबीएस के साथ एकीकृत करने का प्रयास करेगा, लेकिन यह हमेशा संभव नहीं हो पाता। ऐसे में मजबूत सिस्टम व परिचालन नियंत्रण कम से कम खामियों व कमजोरियां सुनिश्चित करेगा। 
 
एक प्राइवेट बैंकर के मुताबिक, अलग-अलग बैंकों में हर समय धोखाधड़ी होती है, लेकिन अहम यह है कि इसे कितनी जल्दी पकड़ पाता है। एक बड़े निजी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, निजी क्षेत्र सामान्य तौर पर अपने सिस्टम व प्रक्रियाओं को लेकर जिद्दी होते हैं। मैं यह नहींं कह सकता कि हमारे बैंक में धोखाधड़ी नहीं होती, लेकिन यह एक या दो तिमाही में पकड़ में आ जाती है। ऐसा इसलिए मुमकिन हो जाता है क्योंकि सिस्टम रिपोर्ट बराबर देते रहता है और ऐसा कोई जरिया नहीं है कि धोखाधड़ी का पता हमेशा न चल पाए यानी यह दबा रह जाए।
 
यहां अन्य मसला विशेषज्ञता के स्तर को लेकर है, जो एक निजी क्षेत्र के व्यक्ति को मिलता है और इसकी तुलना सरकारी बैंंकर से नहीं की जा सकती। एक सरकारी बैंक के महाप्रबंधक ने कहा, निजी क्षेत्र के बैंक में अगर एक व्यक्ति करेंसी का काम देख रहा है तो वह करियर की बाकी अवधि में करेंसी में विशेषज्ञता बनाए रखेगा। वह बॉन्ड पर काम नहीं कर पाएगा और जनरल क्रेडिट में वह नौसिखिया होगा। सरकारी बैंकों में ऐसा कभी नहीं होता। लेकिन इसमें बदलाव होने लगा है और बैंकर अब कह रहे हैं कि बैकों में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करने के लिए बहुत लोग नहीं हैं।
कीवर्ड nirav modi, bank, loan, debt, PNB, fraud,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक