ताइवान, सूरत, हॉन्ग कॉन्ग व दुबई तक फैले हैं तार

साईं मनीष | नई दिल्ली Feb 20, 2018 10:10 PM IST

बिजनेस स्टैंडर्ड को मिले दस्तावेज से पता चलता है कि हॉन्ग कॉन्ग की कुछ इकाइयों के मालिक दुनिया भर में यानी भारत में सूरत से लेकर ताइवान में ताइपे व दुबई से लेकर संयुक्त अरब अमीरात और हॉन्ग कॉन्ग तक फैले हुए हैं। इन इकाइयों को फरवरी में एक हफ्ते के भीतर 4.5 करोड़ डॉलर से ज्यादा का भुगतान किया गया। यह भुगतान नीरव मोदी के निर्देश से पंजाब नैशनल बैंक के अधिकारियों की तरफ से हुआ। नीरव मोदी और उनके कारोबारी सहयोगी मेहुल चोकसी के बारे में अरबों डॉलर के इस घोटाले में काफी कुछ कहा गया है, लेकिन उन इकाइयों के बारे में कम जानकारी है जिन्हें हॉन्ग कॉन्ग स्थित भारतीय बैंकों ने रकम का भुगतान किया। बिजनेस स्टैंडर्ड हॉन्ग कॉन्ग की इकाइयों की विस्तृत जानकारी दे रहा है, जो प्रवर्तन निदेशालय व सीबीआई की जांच के घेरे में हैं क्योंकि इन एजेंंसियों ने घोटाले के मामले में वैश्विक स्तर पर खोज शुरू कर दी है, जिसे भारत के कॉरपोरेट के इतिहास में सबसे बड़े वित्तीय घोटाला के तौर पर देखा जा रहा है।
 
एक प्रतिकृति इन इकाइयों के कंपनी सचिवों के कार्यालयों को भेजी गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।  इन कंपनियों में एक का नाम ऑरा जेम्स है, जिससे मोदी की कंपनियों ने कथित तौर पर करोड़ों डॉलर के हीरे का आयात किया। यह कंपनी हॉन्ग कॉन्ग की है, जिसके मालिक भारत के शैलेष सोनू मेहता हैं। दस्तावेज बताते हैं कि मेहता के पास भारतीय पासपोर्ट है, बावजूद इसके वह दुबई से कंपनी का परिचालन करते हैं। मेहता दुबई में अल जाफाह इमारत में रहते हैं, जो अल राफाह पुलिस स्टेशन के पास है। यह अपार्टमेंट दुबई क्रीक के पश्चिम में जाने माने रिहायशी इलाके में हैं। ऑरा जेम्स में मेहता एकमात्र हिस्सेदार हैं और इनके पास 85 लाख से ज्यादा शेयर हैं। अन्य व्यक्ति नरेशकुमार दिव्येशकुमार गांधी कंपनी के निदेशक हैं। गांधी हॉन्ग कॉन्ग के नागरिक हैं और अभी हॉन्ग कॉन्ग के कोलून जिले में लूना टावर में रहते हैं। ऑरा जेम्स का कार्यालय पेननसुला स्क्वैयर के नौंवें तल पर है, जो गांधी के आवास से 10 मिनट की दूरी पर है। ऑरा जेम्स ने कथित तौर पर इलाहाबाद व ऐक्सिस बैंक की हॉन्ग कॉन्ग शाखा से करोड़ों डॉलर हासिल किए, जो पीएनबी की भारतीय शाखा से फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग के जरिए मिले थे। सीबीआई के एफआईआर के मुताबिक, दुबई की अन्य कंपनियों के साथ ऑरा जेम्स ने मोदी की कंपनियों को हीरे के निर्यात के लिए भुगतान के तौर पर 3.2 करोड़ डॉलर हासिल किए, जिनमें सोलर एक्सपोट्र्स व डायमंड्स 4 यूएस शामिल है।
 
मोदी की भारतीय कंपनियों को हीरे के निर्यात के जरिए रकम हासिल करने वाली हॉन्ग कॉन्ग की अन्य कंपनी है सिनो ट्रेडर्स। दस्तावेज बताते हैं कि ताइवान के मिन टुंग ली सिनो ट्रेडर के मालिक हैं। ताइपेई में रहने वाले ली के पास सिनो ट्रेडर्स के 80 लाख शेयर हैं। सिनो ट्रेडर्स का परिचालन केंद्रीय हॉन्ग कॉन्ग स्थित एक इमारत से हो रहा था और इसका कार्यालय ऐक्सिस बैंक व इलाहाबाद बैंक की शाखाओं से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर है। दुबई की अन्य कंपनियों के साथ सिनो ट्रेडर्स को जिस एलओयू के आधार पर 2.8 करोड़ डॉलर से ज्यादा मिले, उसे पंजाब नैशनल बैंक ने फरवरी में जारी किया था। 9 फरवरी को इलाहाबाद बैंक की हॉन्ग कॉन्ग शाखा को 45 लाख डॉल का एलओयू जारी कर सिनो ट्रेडर्स को भुगतान करने को कहा गया। 12 फरवरी को 1.2 करोड़ डॉलर के दो एलओयू इलाहाबाद बैंक की हॉन्ग कॉन्ग शाखा को मिले, जो अन्य कंपनियों के अलावा सिनो ट्रेडर्स को भुगतान के लिए थे। 14 फरवरी को करीब 1.2 करोड़ डॉलर के दो एलओयू ऐक्सिस बैंक की हॉन्ग कॉन्ग शाखा को जारी किए गए। ऐसे लेनदेन में से कुछ में ऑरा जेम्स व सिनो ट्रेडर्स को मोदी की भारतीय कंपनियों को हीरे के निर्यात के बदले रकम मिलनी थी। दस्तावेज बताते हैं कि हॉन्ग कॉन्ग की इकाई सनशाइन जेम्स (जिसे मोदी की कंपनियों को हीरे के निर्यातकों में से एक है) को भारत में हीरा केंद्र सूरत में खोजा जा सकता है। कंपनी का परिचालन हालांकि हॉन्ग कॉन्ग में कोलून जिले से होता है, वहीं इसके मालिक मोहनदास आशिषकुमार लाड सूरत में केशवनगर में रहते हैं। लाड सनशाइन जेम्स के अकेले मालिक हैं और इनके पास 80 लाख शेयर हैं।
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