पीएनबी को देनी होगी ज्यादा पूंजी!

अरूप रॉयचौधरी | नई दिल्ली Feb 21, 2018 10:37 PM IST

पीएनबी धोखाधड़ी

बैंक में फर्जीवाड़े के बाद सरकार बैंकिंग क्षेत्र में कर सकती है तेज सुधार
त्वरित सुधार कार्रवाई सूची में पीएनबी किया जा सकता है शामिल
फिलहाल बैंक के विभिन्न प्रदर्शन मानकों की हो रही समीक्षा
बैंक को पूंजी हासिल करने के लिए उठाने होंगे सख्त कदम

नीरव मोदी फर्जीवाड़े में 114 अरब रुपये का झटका खाने के कारण पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) को पुनर्पूंजीकरण योजना के तहत सरकार से अधिक रकम मिल सकती है। बिज़नेस स्टैंडर्ड को पता चला है कि बैंक के प्रदर्शन मानकों की जांच हो रही है और यह देखा जा रहा है कि उसे भारतीय रिजर्व बैंक की त्वरित सुधार कार्रवाई (पीसीए) वाली सूची में डालने की जरूरत तो नहीं है।

इस फर्जीवाड़े के बाद नरेंद्र मोदी सरकार बैंकिंग क्षेत्र में सुधार की प्रक्रिया तेज कर सकती हैं। इसके तहत आईडीबीआई के निजीकरण, सरकारी बैंकों में निदेशक मंडल और प्रबंधन स्तर पर बदलाव तथा आंतरिक ढांचे और ऑडिटरों की नियुक्ति के नियम कड़े करने जैसे उन कदमों को गति मिल सकती है, जो अभी तक ठंडे बस्ते में पड़े थे। एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा, 'आरबीआई को देखना होगा कि फर्जीवाड़ा बैंक के विभिन्न मानकों को किस तरह प्रभावित करेगा। नतीजा जो भी सामने आए, लेकिन पीएनबी के लिए पूंजी में इजाफा तो करना ही पड़ेगा।'

बैंक पुनर्पूंजीकरण के तहत वित्त वर्ष 2017-18 में पीएनबी को सरकार को 54.7 अरब रुपये मिलने हैं। बैंक को यह रकम को दो वर्षों में मिलेगी और इनमें 1.35 लाख करोड़ रुपये का बैंक पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड कार्यक्रम भी शामिल है। वित्त वर्ष 2018 में सरकार को 881 अरब रुपये आवंटित करने थे। 11 कमजोर बैंकों या त्वरित सुधार की जरूरत वाले बैंकों को 523 अरब रुपये आवंटित होने हैं।

मजबूत समझे जाने वाले 9 बैंकों के लिए 358 अरब रुपये का इंतजाम किया गया है। पीएनबी का नाम भी इस फेहरिस्त में शामिल है। अधिकारी ने कहा कि पुनर्पूंजीकरण के लिए दो पहलुओं पर विचार होता है। पहला नियामकीय एवं प्रावधान संबंधी शर्तों का अनुपालन है और दूसरा कारोबार बढ़ाने के लिए आवश्यक पंूजी है। आरबीआई ने चार क्षेत्रों- पूंजी, लाभ, परिसंपत्ति गुणावत्ता और कर्ज- में कुछ सीमाएं तय की हैं और इनके आधार पर ही यह तय करता है कि किस बैंक को पीसीए के तहत लाना है। 

नीरव मोदी फर्जीवाड़े के बाद पीएनबी को अगली तिमाही तक पीसीए सूची में डाला जा सकता है। पीसीए के तहत जो कदम उठाए जा सकते हैं, उनमें लाभांश वितरण, ऊं चे प्रावधान, विस्तार पर रोक और प्रबंधन के वेतन-भत्ते एवं निदेशकों की फीस में कमी सहित दूसरे उपाय शामिल होंगे। सरकार ने स्पष्टï कर दिया है कि अब सुधारों के नए दौर के साथ बैंकों को पूंजी दी जाएगी। इनमें कुछ सुधार पर विरोध के स्वर उभर सकते हैं, लेकिन सरकार इन्हें जल्द से जल्द लागू करने पर विचार कर रही है।

एक अन्य अधिकारी ने कहा, 'आईडीबीआई में हिस्सेदारी बिक्री करने का यह बेहतरीन समय है। अन्य उपायों में सरकारी बैंकों के निदेशक मंडल और प्रबधंन की भी नब्ज टटोली जाएगी।' पिछले महीने वित्त मंत्री अरुण जेटली ने स्पष्टï किया था कि निजीकरण पर सरकार ने मन नहीं बदला है और इसे उपयुक्त समय पर अंजाम दिया जाएगा।

मार्च में बैंक बोर्ड ब्यूरो (बीबीबी) बंद करने पर पहले ही सहमति बनती दिख रही है। अधिकारी ने बताया कि बीबीबी की जगह कोई अन्य ढांचा खड़ा करने की चर्चा है। मंगलवार को पीएनबी में हुए फर्जीवाड़े पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि बैंक के शीर्ष प्रबंधन और ऑडिटरों ने इस मामले में लापरवाही बरती है। उन्होंने आरबीआई को भी नहीं छोड़ा और कहा कि बैंकिंग नियामक को सुनिश्चित करना होगा कि ऐसा फर्जीवाड़ा आगे न हो। इस बीच आरबीआई ने अपने पूर्व बोर्ड सदस्य वाई एच मालेगाम की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया किया है, जो परिसंपत्ति वर्गीकरण और बैंकों द्वारा दिए जाने वाले प्रावधान और केंद्रीय बैंक के ऑडिटरों द्वारा इसकी पड़ताल में भिन्नता पर विचार करेगी।
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