मोतियों के आयात नियम से विवाद

सोमेश झा | नई दिल्ली Feb 22, 2018 09:51 PM IST

रकम जमा कराने से पहले नहीं की गई जांच-परख

नीरव-चोकसी की कंपनियों ने मोतियों के आयात के लिए मांगा था कर्ज

मोतियों के आयात पर उधारी सुविधा को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देश ने 114 अरब रुपये के घोटाले से जुड़े बैंकों के बीच विवाद खड़ा कर दिया है। यह घोटाला पंजाब नैशनल बैंक की तरफ से फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग जारी करने के चलते हुआ है। पीएनबी ने जांच एजेंंसियों से कहा है, मोतियों के कारोबार के लिए उधारी सुविधा को लेकर आरबीआई का कोई विशिष्ट दिशानिर्देश नहीं है। नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की कंपनियों ने मोतियों के आयात के लिए कर्ज मांगा था। बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, अगर आप आरबीआई की तरफ से जारी पुराने परिपत्रों को देखेंगे तो इसमें मोतियों को अलग से संदर्भित किया गया है। लेकिन लगता है कि नियामक ने इसे हटा दिया है, जिससे बैंकरों के बीच अस्पष्टता देखने को मिली है। 

बैंक अधिकारी ने कहा कि वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय ने भी मोती को कारोबार के अलग उत्पाद के तौर पर वर्गीकृत किया है। पीएनबी ने कहा है कि वह इस घोटाले से जुड़ी वास्तविक देनदारी ही चुकाएगा और संकेत दिया है कि अन्य बैंकों को इसका भार सहना पड़ सकता है।

पीएनबी का मानना है कि भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं ने पीएनबी के विदेशी खाते में रकम जमा कराने से पहले जांच परख (ड्यूडिलिजेंस) नहीं किया, जिसे नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की समूह कंपनियों के साथ सौदा करने वाली कंपनियों को हस्तांतरित किया गया। पीएनबी ने सीबीआई को भेजी शिकायत में कहा था कि आरबीआई ने कम बहुमूल्य व वहुमूल्य रत्नों के आयात की खातिर अधिकतम 90 दिन के लिए उधारी की सुविधा तय की है, लेकिन ज्यादातर मामलों में यह सुविधा करीब 360 दिन के लिए दी गई। पीएनबी ने अपना तर्क देते हुए मोतियों को कम बहुमूल्य व वहुमूल्य रत्नों के तौर पर वर्गीकृत किया।

पीएनबी ने अपनी शिकायत में कहा है, यह भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं ने कभी भी आरबीआई के दिशानिर्देशों के उल्लंघन की बात नहीं कही और धोखाधड़ी वाले एलओयू पर रकम मुहैया कराते रहे। हालांकि अन्य बैंकों का तर्क है कि मोती गैर-पूंजीगत सामान के तहत आती है, जिसके लिए एक साल तक के लिए या आयातक के परिचालन चक्र तक के लिए (जो भी कम हो) एलओयू जारी किए जाते हैं। प्रभावित बैंकों में भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, ऐक्सिस बैंक, यूको बैंक, केनरा बैंक और इलाहाबाद बैंक शामिल हैं।
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